वाघेला ने कांग्रेस छोड़ी, भाजपा में लौटने का कोई इरादा नहीं


दिल्ली : चुनावी राज्य गुजरात में कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए इसके कद्दावर नेता शंकर सिंह वाघेला ने आज पार्टी छोडऩे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की सुपारी ली है। आरएसएस के पूर्व स्वयंसेवक वाघेला ने यह नाटकीय घोषणा अपना 77 वां जन्म दिन मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में की। इसके एक दिन पहले ही राज्य में कांग्रेस के अंदर फूट सामने आई थी, जब यह ब्योरा आया कि पार्टी के 57 में से कम से कम आठ विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को वोट नहीं दिया।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वाघेला ने 20 साल पहले भाजपा छोड़ दी थी और राष्ट्रीय जनता पार्टी (आरजेपी) का गठन किया था। उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने से पहले 1996 में आरजेपी सरकार का नेतृत्व किया था। क्षत्रिय समुदाय से आने वाले वाघेला ने कहा कि वह भाजपा या किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह राजनीति से सन्यास लेने नहीं जा रहे, जिससे इन अटकलों को बल मिला है कि वह खुद की पार्टी बना सकते हैं और फिर कांग्रेस विरोधी, भाजपा विरोधी मोर्चा बना सकते हैं। उनके समर्थक उन्हें बापू कह कर पुकारते हैं।

उन्होंने कहा, आज, मैं खुद को कांग्रेस से आजाद करता हूं और कांग्रेस को भी मुक्त करता हूं।  गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और संग्रग सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे वाघेला ने कहा कि वह कोई बंधुआ मजदूर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया, आप (कांग्रेस) ने गुजरात में भाजपा को जिताने की उससे सुपारी ली है। आप भाजपा का मुकाबला नहीं कर रहे और जो उसका मुकाबला करना चाहते हैं उन्हें यह करने नहीं दे रहे। हालांकि, कांग्रेस ने कहा कि इसने वाघेला को नहीं निकाला है ना ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्वाई की है।

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