‘धर्म के नाम पर हिंसा ठीक नहीं’


नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भीड़ द्वारा की जा रही हिंसाओं की निंदा की है। उन्होंने धर्म के नाम पर भीड़ द्वारा की जा हिंसा में लोगों की हत्या को नफरत की राजनीति करार दिया है। केजरीवाल ने कहा कि नफरत की राजनीति की हवा चल रही है उससे नुकसान ही हो रहा है, यदि नेता इससे बचें तभी कुछ सुधार सम्भव है। हिस्सा किसी धर्म में जायज नहीं, हर धर्म मदद करना सिखाता है, किसी का कत्ल करना पाप है। अरविंद केजरीवाल कार्यकर्ताओं के साथ हर माह के पहले रविवार को किए जाने वाले गूगल हैंगआउट में बात कर रहे थे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे। केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि आज देश में नफरत की राजनीति की प्रवृत्ति चल रही है। हमें इसे खत्म करना है। हम सबको मिलकर इसका विरोध करना चाहिए। हमे इसके प्रति जागरूकता करनी होगी। वहीं केजरीवाल ने जीएसटी को अच्छा बताया लेकिन इसके लागू करने पर सवाल खड़े किए।

वहीं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जीएसटी से मंहगाई बढऩे का दावा किया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जीएसटी को व्यापारी और मंहगाई बढऩे वाला करार दिया है। सिसोदिया ने कहा कि जीएसटी से व्यापारी परेशान होगा और लोगों की जरूरत की छोटी-छोटी चीजे महंगी हो जाएगी। सिसोदिया ने कहा कि जीएसटी से सर्विस सेक्टर महंगा हो रहा है। सर्विस सेक्टर पर 15 फीसदी टैक्स लगता था, लेकिन अब वह 18 फीसदी हो गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि इसका आपकी जेब पर क्या फर्क पढ़ेगा इसको जानने की जरुरत है। मोबाइल का अगर एक हजार का बिल आता था तो उस पर सर्विस टैक्स 150 था लेकिन अब 180 रुपए लगेगे। एक रिक्शे वाला भी महीने में 400 रुपए का रिचार्ज कराता है।

उस पर 50 रुपए लगते थे अब 70 रुपए लगेंगे। बच्चों को आज कोचिंग की जरुरत होती है वह भी तीन मंहगी हुई है। सिसोदिया ने कहा कि एक सामान्य आदमी भी जो 10-15 हजार की नौकरी करता है वह भी के्रडिट कार्ड लेता है। क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर 15 फीसदी से 18 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा। आम आदमी बीमा कराने की भी सोचता है। बीमा पर भी सर्विस टैक्स लगता है। बीमा भी महंगा हो जाएगा। यह सभी चीजे सर्विस से मंहगी हो रही है। सरकार खजाना भरने के लिए टैक्स लगा रही है। लुटाने नहीं अपना खजाना भरने जा रही है। स्कूल बेग पर 5 फीसदी से टैक्स 18 फीसदी टैक्स लगेगा। दौ सौ रुपए के स्कूल बैग पर 10 रुपए लगते थे अब 18 लगेंगे। नोट बुक पर जीरो फीसदी टैक्स था अब 12 फीसदी हो गया। ड्रॉइगिंग बुक पर भी टैक्स बढ़ गया। आटा दाल चावल इस पर टैक्स नहीं होता था। अब इन पर टैक्स लगा दिया है। सारी खाने पीने की चीजों पर टैक्स लगा दिया। यह लोग कह रहे हैं कि हमने तो ब्रांडेड पर लगाया है। ‘

आपके बाजू में किराने और परचून की दुकान पर जाकर देखें। उस पर दो तीन तरह के ब्रांडेड आटे होते है। वह भी ब्रांड है। वह भी पैकेट में बेचता है। सभी लोग पैकेट में आटा लेने की सोचते हैं। अगर वह पैकेट है तो वह महंगा है। उस पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा। गरीब आदमी का सूती कपड़ा माना जाता है। गांधी ने खादी को व्यापार से जोड़ा था आज भी जुड़ा है। हमने भी इसी तरह का टैक्स लगा दिया था, लेकिन कपड़ा व्यापारियों के कहने पर हमने वापस ले लिया था। ब्रांडेड शर्ट के आलावा कपड़े पर टैक्स लगा रहे है। सिसोदिया ने कहा कि अगर 10 हजार की टाइल लगाओगे तो 2800 रुपए का टैक्स लगेगा यह पहले 500 रुपए था। कपड़े धोने के साबुन को 12 फीसदी से 28 फीसदी टैक्स कर दिया। लोगों में बिस्कुट पर जीरो फीसदी टैक्स था अब 12 पर फीसदी हो गया। जीएसटी से छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू किया गया इसे हम नए घर बनाने की तरह सोचते है।

लेकिन यह नया घर पुरानी बुनियाद पर खड़ा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को एक टैक्स स्लैब लगाना चाहिए। पांच-पांच फीसदी में केंद्र और दिल्ली सरकार चल सकती है। टैक्स कम करो तो जनता ज्यादा टैक्स देती है। बढ़ाओ तो टैक्स चोरी होती है। व्यापारियों की तकलीफे बढ़ गई है। व्यापारियों को रिटर्न कई तरीके के फाइल करने पडं़ेगे। व्यापारी का काम अब व्यापारी नहीं चार्टेड एकाउंटेंट करेगा। इंटरनेट पर कितना हिसाब रखेंगे। जीएसटी पर सिंगल टैक्स होता तो कोई दिक्कत नहीं थी। उन्होंने कहा कि जीसएटी लागू करने वाले हम 161 वें देश में शामिल हुए है। लेकिन किसी भी देश में शराब और रियल स्टेट को जीएसटी से बाहर नहीं रखा गया है। लेकिन भारत में शराब और रियल स्टेट को जीएसटी से बाहर रखा है। उन्होंने कहा कि इसमें ऐसा क्योंकि इसमें कालाधन लगा हुआ है। मंैने जीएसटी काउंसिल में भी यही बात रखी थी।

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