8 महीने तक किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग


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दक्षिणी दिल्ली: एम्स को देश का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक माना जाता है। शायद यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। इसकी वजह से एम्स पर मरीजों का दबाव कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है। यह दबाव कितना ज्यादा होता है इसकी एक बानगी इसी बात से मिल जाती है कि यहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को आठ से दस महीने की वेटिंग दी जा रही है। एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एसके अग्रवाल के मुताबिक हर सप्ताह एक से दो मरीजों का ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। मरीजों को तत्काल इलाज मुहैया कराने के लिए सप्ताह में हर दिन ट्रांसप्लांट के लिए 3 घंटे की ओपीडी की सुविधा भी है।

बावजूद इसके अभी 300 मरीजों की वेटिंग चल रही है। उनका मानना है कि किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर दो तरह की परेशानियां देखने को मिल रही हैं। पहला डोनर तो दूसरा अस्पताल। सरकारी अस्पतालों में इस तरह की सुविधा नहीं है। जिन निजी अस्पतालों में इसकी सुविधा है वहां इसका खर्च बहुत ज्यादा आता है। इसके बावजूद वहां भी वेटिंग है। डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि सरकारी क्षेत्र के अन्य अस्पतालों में जब तक इस तरह की सुविधाओं का दायरा नहीं बढ़ेगा, तब तक एम्स में मरीजों का भार कम नहीं होगा।