लोकतंत्र के चारों स्तंभों का स्वतंत्र खड़े रहना जरूरी : उद्धव ठाकरे


U Thackeray

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विवाद में केंद्र सरकार की सहयोगी शिवसेना भी कूद पड़ा है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चारों न्यायाधीशों का समर्थन करते हुए कहा है कि भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में जो शुक्रवार को घटित हुआ है वह वास्तव में परेशान करने वाला है। ठाकरे ने आज कहा कि वह चारों न्यायाधीशों का पूरा समर्थन करते हैं। न्यायाधीशों ने मामले को देश के समक्ष रखकर अच्छा काम किया है।

सोहाराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के जज लोया की मौत के मामले में जांच कराये जाने की मांग करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा यदि किसी ने कुछ गलत नहीं किया है, तो उसे जांच से क्या परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस बात का पता लगाना चाहिए कि कहीं ये कोई षडयंत्र तो नहीं है। क्या कानून को ‘गूंगा -बहरा’ बनाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है। न्यायपालिका के मसले को जाहिर करने पर जजों की प्रशंसा करते हुए ठाकरे ने कहा ‘मामले में सरकारी हस्तक्षेप न हो।’

शिवसेना प्रमुख ने कहा ‘कल जो कुछ हुआ वह बहुत परेशानी करने वाला है।’ उन्होंने कहा ‘संवाददाता सम्मेलन करने वाले चारों न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की जा सकती है, किन्तु हमें यह जरुर समझना होगा कि आखिर यह उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा। लोकतंत्र के चारों स्तंभों को स्वतंत्र खड़ा रहना है। यदि ये स्तंभ एक-दूसरे पर गिरे, तो लोकतंत्र ढह जायेगा।’


गौरतलब है कि शीर्ष न्यायालय के चार न्यायाधीशों रंजन गोगोई, जस्ती चेलमेश्वर, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ ने कल संवाददाता सम्मेलन कर न्यायपालिका से जुडी दिक्कतों को रखा था।

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