गुजरात : वघेला आज दे सकते हैं कांग्रेस को झटका, जानें घमासान की महत्त्वपूर्ण बातें


अहमदाबाद : गुजरात कांग्रेस को आज बड़ा झटका लग सकता है। आज शंकर सिंह वाघेला का जन्मदिन है और इस मौके पर बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कई विधायक, सांसद और समर्थक आएंगे। इस कार्यक्रम के जरिए वाघेला अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे और माना जा रहा है कि वह कांग्रेस को छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं।

इसी नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यदि वह ऐसी घोषणा करते हैं तो कांग्रेस की राज्‍य यूनिट में घमासान हो सकता है। पिछले दो दशक से राज्‍य की सत्‍ता से बाहर कांग्रेस की इस बार सत्‍ता में लौटने के मंसूबों पर पानी फिर सकता है।

वाघेला राजनीति से ले सकते है सन्यास

 दरअसल इसी साल गुजरात में चुनाव होना है लिहाजा वह चाहते हैं कि कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे। लेकिन सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया है, हालांकि उन्हें इस बात का आश्वासन दिया गया है कि उन्हें सीटों के बंटवारें में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि वाघेला राजनीति से सन्यास की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन उनके बेटे महेंद्र ने इस संभावना से इनकार किया है।

भाजपा में हो सकते हैं शामिल

इसके अलावा एक बड़ा कयास यह लगाया जा रहा है कि वाघेला कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ऐसा करने से वाघेला को कोई खास लाभ नहीं होने वाला है, बल्कि भाजपा को ही मजबूती मिलेगी। आपको बता दें पीएम मोदी एक समय में वाघेला को अपना राजनीतिक गुरू मानते थे। ऐसे में अगर वाघेला भाजपा में शामिल होते हैं तो भाजपा मजबूत होगी, लेकिन मुमकिन है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा।

तीसरा मोर्चा भी बना सकते हैं वाघेला

आज के इस कार्यक्रम के जरिए शक्ति प्रदर्शन करेंगे और इस बात का दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, ताकि कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे। साथ ही वाघेला के पास एक विकल्प यह भी है कि वह अलग अपनी पार्टी का ऐलान करे और बतौर थर्ड फ्रंट के तौर पर गुजरात के चुनाव में अपनी दावेदारी मजबूत करें। वाघेला ने कहा कि वह आज होने वाले कार्यक्रम में खुलकर बात करेंगे, ऐसे में देखने वाली बात है कि क्या वाघेला कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा का दामन थामते हैं या फिर किसी अन्य विकल्प की ओर जाते हैं।

घमासान की महत्त्वपूर्ण बातें :

  • 1990 के दशक में गुजरात के मुख्‍यमंत्री रह चुके शंकर सिंह वाघेला गुजरात के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका अपना जनाधार है. पूरे गुजरात में उनके समर्थक फैले हुए हैं और पूरे राज्‍य में इस दौर के ‘बापू’ के नाम से वह मशहूर हैं। अपनी इसी छवि के चलते वह चाहते थे कि इस बार के चुनावों में कांग्रेस उनको मुख्‍यमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित कर दे. लेकिन कांग्रेस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
  • कांग्रेस आलाकमान से अंतिम मुलाकात के भी वांछित नतीजे नहीं निकले। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक उनको स्‍पष्‍ट कर दिया गया कि यदि उनको कांग्रेस की तरफ से सीएम उम्‍मीदवार घोषित कर दिया गया तो राज्‍य के दिग्‍गज कांग्रेसी नेता अंसतुष्‍ट हो सकते हैं। यानी कांग्रेस राज्‍य पार्टी चीफ भर‍त सिंह सोलंकी और दो पूर्व नेता प्रतिपक्ष शक्ति सिंह गोहिल और अर्जुन मोढवाडिया को नाराज नहीं करना चाहती।
  • सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस से अलग होने की स्थिति में वाघेला एक तीसरे मोर्चे का गठन कर सकते हैं। इसमें नेशनलिस्‍ट कांग्रेस पार्टी, जदयू और सियासी फलक पर उभरते हुए नए सितारे हार्दिक पटेल, अल्‍पेश ठाकुर और जिग्‍नेश मेवानी को शामिल किया जा सकता है। इन उभरते हुए नेताओं का क्रमश: पाटीदारों, ठाकुर और दलित समुदाय में अच्‍छा जनाधार है। उल्‍लेखनीय है कि वाघेला ने 17 साल पहले बीजेपी से अलग होने के बाद गठित अपनी राष्‍ट्रीय जनता पार्टी (आरजेपी) का विलय कांग्रेस में कर दिया था।
  • पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह से वाघेला के मधुर संबंध हैं। कुछ समय पहले गुजरात विधानसभा में शाह के साथ वाघेला की मुलाकात भी हुई थी। उस मुलाकात के आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे थे। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि वाघेला राजनीति से रिटायर होने की घोषणा कर सकते हैं। यह भी बीजेपी के लिए बेहद फायदेमंद होगा. बदले में बीजेपी उनके बेटे को राज्‍यसभा भेज सकती है।
  • कांग्रेस से अलग वाघेला की किसी भी योजना का सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। ऐसा इसलिए क्‍योंकि बीजेपी राज्‍य में हाल में हुए पाटीदार आंदोलन, दलितों से संबंधित ऊना कांड के बाद थोड़ा बैकफुट पर रही है। माना जा रहा है कि इन वजहों से बीजेपी के वोटबैंक पर चुनावों में असर पड़ सकता है। ऐसे में वाघेला के अलग होने के बाद कांग्रेस उसका पूरी तरह से सियासी फायदा नहीं उठा सकेगी। ऐसे में बीजेपी के लिए चुनावी राह आसान हो जाएगी। वैसे भी 193 सदस्‍यीय विधानसभा में बीजेपी अबकी बार 150 सीट जीतने के लक्ष्‍य के साथ उतर रही है।