बीमारियों को निमंत्रण दे रही घास से अटी ड्रेन


निसिंग: बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। कभी कभी मौसम में होने वाली अधिक बरसात बाढ़ का रूप भी धारण कर लेती है। जिससे जानमाल व फसलों में नुकासान हो जाता है। जिनसे बचाव के लिए बनाई गई ड्रेन समुचित देखरेख के अभाव में महज नाम की बनकर रह गई है। सफाई के अभाव में ड्रेन अनावश्यक घास से अटी पड़ी है। जिसमें से पानी की निकासी हो पाना सफेद हाथी के समान बना हुआ है,लेकिन संबंधित विभाग की ओर से समय पर ड्रेन की सफाई नही करवाई गई,तो  सफाई के अभाव में ड्रेन के किनारें बसने वाले विभिन्न गांवों के क्षेत्र वासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। समस्या किसी विशेष गांव की नही है अपितु क्षेत्र में ड्रेन के आसपास बसने वाले सभी गांवों में समान बनी हुई है।

जिनकी सफाई की ओर नहरी एवं सिचाई विभाग के अधिकारियों का कोई ध्यान नही दे रहे, ध्यान दे भी रहे है तो नाममात्र दिखावा किया जा रहा है। क्षेत्र वासी ग्रामीण शमशेर सिंह, सुभाष, सुरेश, ईशवर, महाबीर, रोशन लाल, दुलाराम, रामपाल, रवि व रामपाल सहित अन्य का कहना है कि शहर के तीन छोर से गुजरती ड्रेन में गंदे नालों व राईस मिलों का बिना ट्रीट किया गया गंदा बदबूदार पानी डाला जा रहा है। ड्रेन में अनावश्यक घास फूस का साम्राज्य होने के कारण जमा गंदे पानी की निकासी नही हो पाती। जिस कारण ड्रेन के किनारें बनी बस्ती व आसपास में गंदे पानी की बदबू का आलम है। जिससे लोगों में बीमारीयां फैलने का अंदेशा बना हुआ है।

बदबू के कारण बस्ती के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर बने हुए है। इतना ही नही ड्रेन में जमा घास व गंदे पानी में बारह महीने मच्छर पनपते है। गर्मी के मौसम में बस्ती के लोगों को ड्रेन में पनपने वाले सांप जैसे विषैले कीटों के घर में घुसने व काटने का भी भय बना रहता है। जिस कारण ड्रेन के आसपास बसने वाले लोग डर के साये में जीने पर विवश है। ड्रेन के आसपास की बस्तियों में समस्या बारह महीने बनी रहती है। बस्ती के लोगों ने प्रशासनिक व संबंधित विभाग के अधिकारियों से ड्रेन की जल्द सफाई करने की मांग की है। ताकि उन्हें गंदे पानी की निकासी के अभाव में होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके।

(रामपाल)