उद्यमशील खेती से किसान और प्रदेश होगा खुशहाल: धनखड़


गुरुग्राम: समय की चुनौतियों को अवसर में बदलकर हमें उद्यमशील खेती पर बढऩा होगा तभी किसान और प्रदेश समृद्धि के रास्ते पर जा सकेंगे। आज हमें 2027 का विजन रखकर प्रदेश को आर्गेनिक राज्य बनाने की दिशा में काम करना होगा। ये विजन हरियाणा के कृषि मंत्री ओ पी धनखड़ ने अपने संबोधन से दिखाया। वे किसान के सामने आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए गुरुग्राम के हिपा में आयोजित मंथनशाला में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।

धनखड़ ने कहा कि आज किसानो के सामने कृषि क्षेत्र में अनेक चुनौतियां हैं, जिनसे पार पाने के लिए टीमवर्क से काम करना होगा। धनखड़ ने कहा कि किसान की जोत कम होना, जमीन का खराब होना, उपलब्ध पानी का सदुपयोग, भूमि के स्वास्थ्य की जाँच अनुसार, जमीन में जीवांश कम होना,फर्टिलाइजर का अंधाधुंध प्रयोग, बीज की जरुरत और गुणवत्ता जैसी चुनौती हैं। इसके अलावा अत्यधिक फर्टिलाइजर कही बीमारी पैदा तो नहीं कर रहा, स्मार्ट क्लाइमेट चेलेंज, फसल आने के समय जोखिम आने की भी चुनौती हैं। धनखड़ ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन जुड़ा है, किसान को अपने उत्पाद की मार्किटिंग करने जैसे विषयों से कैसे लाभ हो, इस पर भी सोचना होगा।

विजन की सफलता को नई सोच जरूरी कृषि मंत्री ने कहा कि विजन, एक नई सोच जरूरी है। विजन एक चुनौती मात्र नहीं है बल्कि उससे भी आगे देखना होगा। हर गांव अपने उत्पाद का ब्रांड बने, मंडी में वैल्यू एडिशन प्लांट लगे, डाइरेक्ट टू फार्मर, डाइरेक्ट टू कंज्यूमर , तकनीक का उपयोग जैसे विषयों पर काम करना होगा। धनखड़ ने कहा कि यदि हम हरियाणा को 2027 तक पूरी तरह से माइक्रो इरीगेशन युक्त और आर्गेनिक खेती वाला प्रदेश बना पाएं तो यह सबके लिए अच्छा होगा। उन्होंने उद्यमशील खेती को ध्येय वाक्य बनाने का आह्वान किया और उस पर काम करने की नसीहत कृषि वैज्ञानिकों को दी। उन्होंने कहा कि हमें क्रॉप मैनेजमैन्ट और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे विषयों पर तेजी से काम करने की जरूरत है। कृषि मंत्री ओ पी धनखड़ ने पहले सत्र में ही मंथनशाला में भाग ले रहे विशेषज्ञों से सुझाव रखने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव डा. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि कृषि के साथ हरियाणा का विकास जुड़ा है इसलिए इस मंथनशाला का उद्देश्य है कि हम ना केवल योजनाओं, परियोजनाओं और आंक ड़ो की समीक्षा करें बल्कि एक दूसरे से कृषि क्षेत्र की संभावनाओं पर खुलकर चर्चा करें ताकि आने वाले समय में हम कमियों का पता लगाकर उन्हें दूर कर सकें। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय मंथनशाला में विभिन्न जिलों से आए कृषि विशेषज्ञों से उनके सुझाव लिए जाएंगे और उनके अनुभवों के साथ आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी कि आने वाले दस वर्षों में हरियाणा में कृषि का स्वरूप क्या होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी किसानों तक पहुंचने का सबसे अच्छा स्त्रोत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मंथनशाला का निश्चित तौर पर किसानों को भविष्य में लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर कृषि विभाग के निदेशक बी के बहेड़ा ने कृषि मंत्री व अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हरियाणा में कृषि क्षेत्र में केन्द्र व राज्य सरकार की प्रायोजित 37 से अधिक योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा अलग राज्य बनने के समय सन् 1966 में प्रदेश का खाद्यान उत्पादन 25 लाख टन था जो अब बढ़कर 170 लाख टन हो गया है। यह किसानों की मेहनत से ही संभव हुआ है लेकिन अब सतत कृषि पर ध्यान देने की जरूरत है जिसमें कृषि उत्पादन बनाए रखने के साथ साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी सुधरे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 83 प्रतिशत भूमि जोत के लिए प्रयोग हो रही है और अगले 10 वर्षों में इसके घटने के आसार है। ऐसे में जमीन और व्यक्ति के अनुपात का अध्ययन करना भी जरूरी है। इन सभी तथ्यों पर मंथन करते हुए हमें भविष्य की रूपरेखा तैयार करनी हैं। मंथनशाला में हिपा के महानिदेशक जी. प्रसन्ना कुमार, किसान आयोग के अध्यक्ष डा. आर के यादव, लुवास के कुलपति गुरदयाल सिंह, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष समय सिंह भाटी, फरूखनगर किसान क्लब के अध्यक्ष राव मान सिंह सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के कृषि, बागवानी, पशुपालन विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

– सतबीर, अरोडा, तोमर