पांच राज्यों की गरीब बेटियों को लिया गोद


गुरुग्राम (सतबीर भारद्वाज) : बेटियों को पढ़ाने के लिए नोरा सोलोमोन फाउंडेशन ने पांच राज्यों की गरीब बेटियों को गोद लिया है। उन बच्चियों का रहन-सहन के अलावा पढ़ाई का पूरा खर्च अब फाउंडेशन उठाएगा। आज इसकी जानकारी फाउंडेशन के अध्यक्ष अशोक सोलोमोन ने दी। इससे पहले गांव बाबूपुर में चिंटल पैराडाइज कार्यक्रम शुरू किया गया। कार्यक्रम में सीईओ अशोक सोलोमोन ने बताया कि यह इस फाउंडेशन ने सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि इसकी अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम किए जाएंगे। इस समय यह संस्था 1600 बच्चों को मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा दे रही है।

फाउंडेशन के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि इस फाउंडेशन की शुरूआत उनकी माता नोरा ने की थी। अब इस संस्था को आगे बढ़ाने के लिए उन्हीं के नाम से यह फाउंडेशन प्रदेश के अन्य राज्यों में भी काम कर रहा है। अशोक सोलोमोन ने बताया कि 16 वर्षोँ से वह समाज सेवा का कार्य कर रहे हैं। आज फाउंडेशन में कोरिया व तिब्बती बच्चों ने भी अपने रंगारंगा कार्यक्रम प्रस्तुत किए, और वे गरीब बच्चे भी शामिल हुए जो पढऩे लिखने की बात तो दूर जो दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज रहते थे।

सोलोमोन ने बताया कि देहरादूर में चल रही आरईएलईके संस्था से भी जुडें हुए हैं। यह संस्था भी ग्रामीण व गरीब तबके लिए काम करती है। वहां पर चल रहे स्कूलों के अलावा उत्तराखंड में भी बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन राज्यों में हमारी संस्था काम कर रही है उनमें 1600 से अधिक बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा उनके रहन-सहन का भी खर्चा संस्था उठा रही है।

अशोक सोलोमोरन ने बताया कि हमारा फाउंडेशन गरीब बेटियों और बच्चों को शिक्षित तो कर रही है इसके अलावा उन बच्चों और गरीब व्यक्तियों की भी सहायता करता है जो लकवा व अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं और अपना इलाज कराने मेें अमसर्थ हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों की मदद करने के लिए एलपीसीईएफ संस्था आगे आई है और हम उनके साथ जुड़कर ऐसे लोगों की सेवा कर रहे हैं। प्रशांत सोलोमोन ने बताया कि हम उन राज्यों में भी जाएंगे जहां पर गरीबी है और बच्चे अशिक्षित हैं।

सोलोमोन के अनुसार आशालता विक्टोरिया विलकिनसन ट्रस्ट से जुड़कर ऐसे स्कूलों को आर्थिक सहायता दे रही है जो अपनी बिल्डिंग और बच्चों का खर्च उठाने में असमर्थ है। हमारा उद्देश्य शहरी क्षेत्र में स्लीम बस्तियां भी हैं। इन बस्तियों में बच्चे पढ़ नहीं पाते । उन्होंने बताया कि जिस शहर में जो संस्था गरीबों के लिए काम करती है उनसे जुड़कर हम जनकल्याण के कार्य कर रहे हैं।

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