नरेश ने जुनैद की हत्या नहीं की, बल्कि अपनी आत्मरक्षा की


हथीन: बहुचर्चित जुनैद हत्याकांड को लेकर अब मामला तूल पकडने लगा है। इसी के चलते गुरूवार को हथीन के गांव भमरौला स्थित स्कूल में एक महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें रावत पाल, सहरावत पाल, डागर पाल, बडगूर्जर, धनखड, चौबीसी के अलावा विभिन्न हिन्दू संगठनों जैसे आर.एस.एस., बजरंग दल, श्री राम युवा संगठन, हिन्दू एकता मंच आदि के हजारों लोगों ने भाग लिया। इस महापंचायत की अध्यक्षता 52 पाल के सरदार सौंध गांव निवासी अरूण जेलदार ने की। महापंचायत में इलाके के ही नहीं बल्कि भिवानी, फरीदाबाद, उत्तरप्रदेश आदि दूर दराज क्षेत्रों से भी मौजिज लोगों ने भाग लिया। महापंचायत का मंच संचालन राजेश सहरावत गहलब ने किया। इस अवसर पर गावं के पूर्व सरपंच सहजराम, कीकर सिंह जटौला, केशव सरपंच पेगंलतू, हिन्दू एकता मंच के जयदेव यादव, राजबीर शर्मा पूर्व सरपंच खाम्बी, भगवान सिंह सरपंच रींडका, डी.के.शर्मा पन्हैडा खुर्द, राजेश भाटी छांयसा, वीर सिंह रहराना, डा. सुरेन्द्र सिंह नंगला जोगियान, लच्छी प्रधान बंचारी, बालक राम शास्त्री जनौली, राहुल मलिक बजरंग दल, भारत भूषण शर्मा हथीन, मोतीलाल शर्मा हथीन, दिनेश मैनेजर हुडीथल, पंडित रवि शंकर बजरंग दल पन्हैडा, गिर्राज सरपंच पृथला, नत्थु गुर्जर खेडा खलीलपुर, वेद पहलवान, डा. कर्नल राजेन्द्र रावत, जोरमल सहरावत कलसाडा, महिपाल बंधु जिला पार्षद आदि वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।

इस महापंचायत का आयोजन बहुचर्चित जुनैद हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए भमरौला गांव के नरेश को न्याय दिलाने की मांग को लेकर किया गया। गांव के पूर्व सरपंच सहजराम ने सर्वप्रथम उक्त घटना के बारे में विस्तार से बताया और नरेश को निर्दोष बताते हुए कहा कि नरेश ने जानबूझ कर हत्या नहीं की, बल्कि उसने अपनी आत्मरक्षा की थी। यदि वह अपनी आत्मरक्षा नहीं करता तो खुद मारा जाता और आत्मरक्षा करना कोई गुनाह नहीं है। विभिन्न वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि हम सबको एकजुट होने की जरूरत है। पुलिस एवं प्रशासन ने एकतरफा कार्यवाही की है। हमें सरकार पर दबाव बनाना है और इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी है। पुलिस की कार्यप्रणाली से सभी नाराज थे। वक्ताओं का कहना था कि पुलिस ने नेताओं के दवाब में आकर एकतरफा कार्यवाही की है। झगडा दोनों तरफ से हुआ था, तो मुकदमा भी दोनों तरफ से दर्ज होना था।

उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्र चिन्ह लगाते हुए कहा कि जब दिल्ली से तीन मुस्लिम युवक ट्रेन में सवार हुए तो 7 युवकों को कैसे चोट आ गई। उन्होंने कहा कि जब झगडा सीट को लेकर हुआ था तो उस समय जुनैद ने फोन करके अपने दोस्तों या परिचितों को, बल्लभगढ स्टेशन पर बुलवाया था। जिन्होंन आते ही बैल्ट, चैन आदि से हमला कर दिया था, जिसमें नरेश के सिर में गम्भीर चोटें आईं थी। वक्ताओं ने कहा कि पुलिस ने जुनैद की कॉल डिटेल क्यों नहीं निकलवाई, चाकू कहां से आया आदि ऐसे अनेकों सवाल हैं जिनको पुलिस ने नजरअंदाज किया है। नरेश दैनिक यात्री था और डयूटी पर जाता था, डयूटी जाने वाला अपने साथ चाकू जैसा हथियार लेकर नहीं चलेगा।

– माथुर

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