हिमाचल चुनाव में वीरभद्र भी एक चेहरा होंगे: कांग्रेस


Virbhadra Singh

नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के आय से अधिक संपत्ति मामले के आरोपों का सामना कर रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़े जाने के बारे में अपने पत्ते अभी तक नहीं खोलते हुए आज कहा कि ”पार्टी सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करती है।”

हालांकि पार्टी को उम्मीद है कि उसके संगठन में युवाओं के कारण उसकी स्थिति तुलनात्मक मजबूत रहेगी। कांग्रेस समिति से जब यह पूछा गया कि क्या कांग्रेस हिमाचल के आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में ही लड़ेगी तो हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ”पार्टी सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करती है। वीरभद्र सिंह भी एक चेहरा होंगे।”

वीरभद्र पर चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले के कारण पार्टी की चुनाव संभावनाओं पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछने पर सुक्खू ने कहा, ”अभी तो इस मामले में अदालत ने आरोप भी तय नहीं किए हैं। अभी यह मामला अदालत के विचाराधीन है। जब मामला अदालत में विचाराधीन हो तो उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।” यह पूछे जाने पर कि क्या आगामी चुनाव में कांग्रेस को सत्ता विरोधी भावना का सामना करना पड़ सकता है,

सुक्खू ने कहा, ”जब कहीं किसी पार्टी की सरकार होती है तो वहां कुछ काम ऐसे होते हैं जिनसे कुछ वर्ग खुश होते हैं और कुछ पूरी तरह से खुश नहीं हो पाते हैं। मेरा मानना है कि पांच साल के कार्यकाल में हमारी सरकार ने बहुत अच्छे काम किए हैं। कुछ मुद्दे हो सकते हैं जो कुछ वर्गों को पसंद न आए हों।”

उन्होंने कहा कि सत्ता विरोधी लहर का चुनाव में इसलिए अधिक असर नहीं होगा क्योंकि संगठन के तौर पर कांग्रेस  हिमाचल प्रदेश में काफी मजबूत है। साथ ही संगठन में नई एवं युवा पीढ़ी को बहुत बढ़ावा दिया गया है। सरकार में कुछ लोग अधिक उम्र वाले हो सकते हैं किन्तु संगठन में अधिकतर लोगों की आयु 50 वर्ष से कम ही है।

हिमाचल PCC President सुक्खू ने बताया कि ब्लाक से लेकर जिला स्तर तक कांग्रेस में युवा लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है और अधिकतर लोग ऐसे हैं जो निचले स्तर से उठकर ऊपर तक आए हैं। कांग्रेस भीतर आपसी खींचतान के चुनाव नतीजों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ”लोकतांत्रिक संस्थाओं में विचारों को लेकर कुछ भिंताहो सकती है। किन्तु संगठन के रूप में सब एक है। साथ ही पार्टी एवं सरकार एक ही प्लेटफार्म पर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि जो भी फैसले किए जाते हैं, वे आपसी संवाद और वरिष्ठ नेताओं से विचार विमर्श करने के बाद ही किए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने हैं क्योंकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल सात जनवरी 2018 को समाप्त हो रहा है। 68 सदस्यीय वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के 36 और भाजपा के 27 सदस्य हैं जबकि पांच निर्दलीय सदस्य हैं। पर्वतीय राज्य में पारंपरिक रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होता है और राज्य के मतदाता आम तौर पर किसी एक दल को स्पष्ट जनादेश देना पसंद करते हैं।

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