आरक्षण को कोई खत्म भी करना चाहे तो कामयाब नहीं होगा : मुख्यमंत्री


पटना : जदयू के दलित-महादलित-आदिवासी प्रकोष्ठ द्वारा पटना के मौलाना मजहरुल हक ऑडिटोरियम सभाकक्ष में आयोजित डॉ0 भीमराव अंबेडकर साहब की 127वीं जयंती समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने उदघाट्न किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग पूरे साल भर के कार्यक्रम का कैलेंडर बना लेते हैं। प्रदेश पार्टी ने यह निर्णय लिया कि राज्य भर में 14 अप्रैल को बाबा साहब अंबेडकर जी की जयंती को पूरे बिहार में हम जिला स्तर तक मनाएंगे। इसी सिलसिले में पटना में भी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, इसके लिए हम आयोजकों का स्वागत करते हैं और बधाई देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंबेडकर साहब कोई मामूली विद्वान नहीं थे, बहुत संघर्ष करते हुए उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी। जितने प्रभावी ढंग से उन्होंने समाज के वंचित तबकों के सारे मुद्दों को आजादी के पूर्व और आजादी की लड़ाई के दौरान उठाया था, इससे गांधी जी भी उनके प्रति बहुत स्नेह रखते थे। जब देश आजाद हुआ तो संविधान के निर्माण के लिए अंबेडकर साहब की अध्यक्षता में ही कमिटी बनाने का निर्णय लिया गया। संविधान का प्रारुप तैयार करने की जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी, उस पर संविधान सभा में, एसेंबली में चर्चा के दौरान पूछे गए प्रत्येक सवालों का बाबा साहब ने खुलकर जवाब दिया।

संविधान के निर्माण में काफी चर्चा हुई और जब संविधान पूरा हुआ तो पूरे देश ने इसे स्वीकार किया। संविधान के रचयिता बाबा साहब को पीढ़ी-दर-पीढ़ी, जब तक ये देश है याद करती रहेगी। नई पीढ़ी के लोगों के बीच भी अंबेडकर साहब के प्रति लोगों में लगाव बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम गांधी जी, लोहिया जी, कर्पूरी जी, जे0पी0 के विचारों से न सिर्फ प्रेरित हैं बल्कि उनके विचारों को धरती पर उतारने का प्रयास भी कर रहे हैं। हम बयानों से बचते हैं, बेवजह के प्रचार-प्रसार से अलग काम करने में विश्वास करते हैं।

पूरे देश में कांग्रेस का शासन था। वर्ष 1957 में सिर्फ केरल में गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी लेकिन वर्ष 1967 में पहली बार देश के 9 राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार बनी। उसके बाद अलग-अलग विचारों वाली पार्टियां एक हुईं और गैर कांग्रेसवाद का दौर चला। 9 राज्यों में संयुक्त दल की सरकार बनी। लोहिया जी ही उसके प्रेरक और नेतृत्वकर्ता थे।

लोहिया जी की एक बात हम हमेशा उद्धृत करते रहते हैं। जब 9 राज्यों में सरकार बनी तो लोहिया जी ने एक ही सुझाव दिया कि मौका मिला है काम करने का तो काम कीजिए, जुबान से कम बोलिये, काम इतना कीजिए कि आपका काम बोले। उस समय मैं छात्र था, उस समय की बात आज तक मेरे दिमाग में है। मेरा मानना भी यही है कि जनसेवा में आप हैं, सार्वजनिक जीवन में आप हैं तो काम कीजिए। जब से मुझे मौका मिला, हमने काम किया, चाहे केंद्र में काम करने का मौका मिला हो या फिर राज्य में, 12 वर्षों से काम करने का मौका मिला, हमने सिर्फ काम किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमलोगों की न्याय यात्रा निकली तो हमने कहा था कि हमारा संकल्प है न्याय के साथ विकास करना। जब हम वर्ष 2005 में सरकार में आए तो हमने कहा था कि न्याय के साथ विकास का मतलब है सभी तबके का विकास, सभी समुदाय, सभी इलाके का विकास। विकास की मुख्यधारा में सबको लाना है। न्याय के साथ विकास का यही मतलब है, कानून का राज स्थापित करना।

हमलोगों ने रुल ऑफ लॉ, कानून का राज स्थापित किया। संविधान में सभी को बराबरी का अधिकार है। संविधान का मूल मकसद है, सबको समानता का अधिकार और यदि अधिकार मिला है तो समान अधिकार का उपयोग करने के लिए उनको सक्षम तो बनाना पड़ेगा। यही वजह है कि उनको संविधान में आरक्षण देने का प्रावधान है और यह एक संवैधानिक प्रावधान है। जब तक धरती है इस प्रावधान को समाप्त करने की किसी को ताकत नहीं है, जो उसका लक्ष्य है, जब तक वो अपने लक्ष्य तक पहुंच नहीं जाता, उसके साथ कोई छेड़छाड़ कर ही नहीं सकता। आप लोगों से कहूंगा कि जो लोग अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से जुड़े हुए हैं, अन्य पिछड़े वर्गों का उसके लिए दिए गए आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता है, जो इसमें छेड़छाड़ करना भी चाहेगा तो कामयाब नहीं हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के हाथ में एसेंबली या पार्लियामेंट का आरक्षण तो नहीं है लेकिन जब नवंबर 2005 में हमारी सरकार बनी, उसके बाद 2006 में पंचायत का चुनाव हुआ, उसमें आरक्षण देने का काम हमने किया। जब राजद और कांग्रेस की मिलीजुली सरकार थी तो उन्होंने क्यों नहीं आरक्षण दिया था। हमने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को आबादी के मुताबिक और पिछड़ों में अतिपिछड़े वर्ग को 20 प्रतिशत का आरक्षण दिया। महिलाओं की आबादी आधी है तो हिस्सेदारी भी 50 प्रतिशत होनी चाहिए। नगर निकायों और पंचायतों का तीन चुनाव भी हो चुका है। हमने इसमें आरक्षण रोस्टर का पालन किया।

जो लोग समाज में कल तक उपेक्षित थे, वे आज नेतृत्व कर रहे हैं। हमलोगों ने हर क्षेत्र में काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमारी सरकार बनी, उस वक्त 12.50 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे, जिसे हमने सबसे बड़ी चुनौती के रुप में स्वीकार किया। उसके लिए हमने काम करने के दौरान सर्वेक्षण कराया। हमने सर्वेक्षण में पाया कि महादलित, अल्पसंख्यक समाज के लोग सबसे पीछे थे। इसके लिए हमलोगों ने टोला सेवक और तालिमी मरकज का काम शुरु किया। उस समय से काम करने का ही नतीजा है कि आज हम एक प्रतिशत तक पहुंच गए है। सभी वर्ग के बच्चे आगे कैसे पढ़ेंगे तो इसके लिए हमलोगों ने काम करना शुरु किया।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को स्कॉलरशिप तो मिलती रही है। वर्ष 2005-06 में इनके स्कॉलरशिप की राशि 32 करोड़ 71 लाख रुपये थी, जो आज की तारीख में बढ़कर 428 करोड़ रुपये हो गयी है। हाल ही में पटना के श्रीकृष्ण साइंस सेंटर में बने “साइंस ऑन स्फियर” के माध्यम से सौरमंडल, आकाशगंगा को प्रदर्शित किया जाता है, इसके माध्यम से रोचक जानकारियां मिलती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी चीज से समझौता मत कीजिए। हम करप्शन, क्राइम और कम्यूनिलिजम से समझौता नहीं कर सकते।

न्याय के साथ विकास के रास्ते चलते रहेंगे और समाज का जो तबका हाशिए पर है, उन सबको मुख्यधारा में लाने के लिए न सिर्फ आरक्षण बल्कि उसके साथ-साथ उनके लिए विशेष इंतजाम किया जाता रहेगा। वर्ष 2005-06 में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग का बजट 40 करोड़ 48 लाख रुपये था, जो वर्तमान में 1,550 करोड़ रुपए का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सात निश्चय के अंतर्गत हर घर नल का जल, हर घर शौचालय, हर घर तक पक्की गली-नाली का निर्माण और हर घर तक बिजली का कनेक्शन सारे ग्राम पंचायत में वार्डवार होना है, इसे चार साल के अंदर पूरा कर लिया जायेगा।

पहले उसी वार्ड से काम शुरु होगा, जिस वार्ड में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या सबसे अधिक है। हम सत्ता में बने रहने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा करने के लिए आए हैं, सत्ता रहे या जाए हम बुनियादी सुविधाओं से कभी समझौता नहीं कर सकते हैं। हम समाज को जोड़ने में यकीन करते हैं, तोड़ने में नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी से समाज में बड़ा परिवर्तन आया है। शराबबंदी के बाद जो इससे जुड़े हुए लोग थे, उनके रोजगार के लिए गाय पालन, ई-रिक्षा, दुकान चलाने की सुविधा के लिए बहुत जल्दी मंथन कर ग्राउंड पर उतारुंगा। बिहार में प्रेम, सद्भाव और शांति का माहौल है।

भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु गोविंद सिंह, चंद्रगुप्त मौर्य, आर्यभट्ट की जन्मस्थली और कर्मभूमि रही है। इसी धरती से गांधी जी 100 साल पहले आजादी का बिगुल फूंकने के लिए नीलहों के खिलाफ आंदोलन के लिए बिहार आए थे। इस अवसर पर भवन निर्माण मंत्री श्री महेश्वर हजारी, राज्यसभा सांसद श्री वशिष्ठ नारायण सिंह, पूर्व मंत्री श्री अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री सह विधायक श्री श्याम रजक, विधान पार्षद श्री तनवीर अख्तर, श्री चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, पूर्व मंत्री श्री नरेंद्र सिंह, पूर्व विधान पार्षद श्री अरुण मांझी, डॉ0 हुलेश मांझी, श्री विद्यानंद विकल, श्री राज किशोर ठाकुर, श्री मुन्ना चौधरी ने भी सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, दलित-महादलित समाज के लोगों के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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