चीन के खिलाफ ‘जैसे को तैसा’ वाली रणनीति अपना रहा है भारत


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन द्वारा बिछाई बिसात पर नजर रख रहे हैं। मोदी की इस रणनीति को कूटनीतिक सही दाव मान रहे हैं जिसमें चीन के शत्रु से मित्रता बढ़ाकर धीरे-धीरे ड्रेगन को उलझाने का धोबीपाट आजमाया जा रहा है। चर्चा है कि पाकिस्तान को छोड़कर चीन की अपने किसी पड़ोसी से नहीं बनती है। दक्षिण-चीन सागर का मसला हो या डोकलाम विवाद उसकी मनमानी गतिविधियों का विरोध करने वालों पर चीन आग उगलता रहता है। भारत ने हालात को भांप कर जापान, मलेशिया, वियतनाम सहित चीन विरोधी देशों के साथ से नये संबंध मजबूत करने की रणनीति चल कर चीन को चौतरफा घेरने का कार्ड फैंका है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दुनिया में रूस के बाद चीन ही एकमात्र देश है जिसकी सीमा 14 देशों से सटी हुई है। इसमें पाकिस्तान को छोड़कर अन्य किसी मुल्क से चीन के सम्बंध मधुर नहीं हैं। चीन व जापान के बीच सेनकाकू द्वीप पर विवाद है।

ताइवान पर चीन हक जताता है। इतना ही नहीं चीन तथा रूस की सीमा 4300 किलोमीटर की है। उसूरी नदी पर स्थित झेन बाओ द्वीप और एर्गननदी पर बसे कुछ द्वीपों के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है। चीन की विस्तारवादी मनमानी नीति के कारण ही मंगोलिया, लाओस, वियतनाम, म्यांमार, अफगान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान तथा ताजिकिस्तान आदि मुल्क उससे रुष्ठ है। इतना ही नहीं चीन नेपाल में आर्थिक निवेश कर रहा है। वहां सड़कें बिछा रहा जबकि चीन की नयत ठीक नहीं है। विवादों की प्रक्रिया में भूटान से भी चीन की तनातनी है। तिब्बत के कुछ हिस्सों को लेकर नाराजगी के चलते ही अब डोकलाम क्षेत्र में चीन की नापाक घुसपैठ से माहौल गर्म है। चीन तथा उत्तर कोरिया के मध्य भी दो नदियों यालू और तुमेन की सीमा रेखा के सवाल पर विवाद जारी है। इसमें भी कई द्वीप हैं और इलाके हैं जिसमें सबसे ऊंचे पर्वत पेकतू पर भी चीन अपना हक जताता है।

यद्यपि दोनों देशों में आर्थिक मित्रता है परन्तु रोष भी पनप रहा है। इस बीच भारत व जापान में सैन्य अभ्यास तथा तकनीक के आदान प्रदान के अलावा अमेरिका के सैन्य अभ्यास से भी चीन चिढ़ा बैठा है। भारत के इंडोनेशिया के साथ हवाई अभ्यास से भी चीन परेशान है। वियतनाम को भारतीय सैनिकों द्वारा सुखोई विमान उड़ाने का प्रशिषण देने की घोषणा से भी चीन परेशान बताया जाता है। थाईलैंड के साथ भारतीय सेना की अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पर नौसेनाएं गश्त करती है जो चीन को नागवार है। किसी भी छिपा नहीं है कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपना एकछत्र राज चाहता है। अन्य देशों का दखल उसे मंजूर नहीं है। भारत के साथ चीन दादागिरी करके भारत को दबाना चाहता है किन्तु 1962 की तर्ज पर चीन को नफे की उम्मीद नहीं है। यदि इस बार जंग छिड़ी तो चीन को लोहे के चने चबाने होंगे।

(दिनेश शर्मा)

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