‘नासूर’ बन चुका है कश्मीर मुद्दा : कांग्रेस


नयी दिल्ली :   वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने आज आरोप लगाया कि कश्मीर मुद्दा ‘नासूर’ बन चुका है और घाटी के लोग केंद्र सरकार और आतंकवादियों के ‘अतिवादी कदमों’ के बीच फंस गये हैं। उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि इससे जम्मू कश्मीर के लोग और सूबे का भविष्य प्रभावित हो रहा है। केंद्र ने कश्मीर को लेकर ‘अतिवादी’ रुख अख्तियार कर लिया है जिससे घाटी की समस्या ‘और बढ़ गयी’ है। केंद्र द्वारा विपक्षी दलों को चीन के साथ टकराव और अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में अवगत कराये जाने के दो दिन बाद उन्होंने यह बयान दिया है।

Source

चिदंबरम ने कहा, “आतंकवादियों ने अतिवादी रुख अख्तियार किया है और उन्हें तुरंत खारिज किए जाने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने अतिवादी कदम उठाया है, जिसने समस्या को बढ़ा दिया है।” गौरतलब है कि विपक्षी दल पिछले साल सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर घाटी में अशांति और हिंसा के लिए केंद्र और पीडीपी-भाजपा की राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं।

‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम फुस्स
चिदम्बरम ने कहा कि दुनिया में भारत को विनिर्माण क्षेत्र का केंद्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले जिस’मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की घोषणा की थी वह पूरी तरह विफल रहा है। श्री चिदम्बरम ने कहा है कि सत्ता में आने के बाद श्री मोदी ने देश को विनिर्माण क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने की घोषणा की थी और वह सचमुच बहुत अच्छी पहल थी क्योंकि कोई भी देश तब ही समृद्ध बन सकता है जब वह अपने लोगों की आवश्यकता की जरूरी वस्तुओं का खुद निर्माण करता है, लेकिन दो साल में मोदी सरकार की’मेक इन इंडिया’नीति घोषणा भर ही बन कर रह गयी है। इस दौरान सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र का निवेश पाने के प्रयास भी बेकार साबित हुये हैं।

Source

पूर्व वित्त मंत्री ने पार्टी के मुख पत्र ‘कांग्रेस संदेश’ के ताजा अंक में प्रकाशित एक लेख में कहा “प्रधानमंत्री मोदी बिल्कुल सही थे जब उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार का लक्ष्य, ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। तब उन्होंने विश्व की विनिर्माण कंपनियों को ‘आओ और भारत में बनाओ’ कहकर आमंत्रित किया था। कोई भी बड़ा देश समृद्ध तभी बनता है जब वह अपने लोगों के उपयोग की वस्तुओं का विनिर्माण शुरू करता है। कोई भी देश यदि अपने लोगों की आवश्यकता वाली वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने में सक्षम है वह तब ही समृद्ध हो सकता है।” श्री चिदम्बरम ने कहा कि अब दो साल बाद ‘मेक इन इंडिया’ की स्थिति क्या है यह सबके सामने है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने विनिर्माण के सकल मूल्य संवर्धन(जीवीए)के जो आंकड़े दिए हैं उसमें 2015-16 की चौथी तिमाही और 2016-17 चौथी तिमाही के बीच लगातार गिरावट दर्ज की गयी है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 15 अगस्त 2015 को ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की घोषणा की थी और उसके बाद कहीं भी यह कार्यक्रम तेज पकड़ता नहीं दिखा है। विनिर्माण क्षेत्र के इस घोषणा से तेजी पकडऩे के उलट इसकी गति काफी धीमी पड़ गयी। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अहम कार्यक्रम के जरिए देश को विनिर्माण क्षेत्र का हब बनाने और इसके लिए कार्यक्रम शुरू किया तो इसके संचालन के लिए उचित प्रशासनिक ढांचागत व्यवस्था तैयार नहीं की गयी। परिणाम यह हुआ कि देश की सकल स्थिर पूंजी संरचना(जीएफसीएफ) हर तिमाही में गिरती रही और एक साल में इसमें 2.3 प्रतिशत की कमी आ गयी, जो एक तरह की आपदा है।

उन्होंने कहा यह कार्यक्रम अच्छा था लेकिन इसे संचालित करने और गति देने में सरकार असफल रही जिसके कारण यह त्रासदी बन गया है। उन्होंने लिखा ” मैंने ‘मेक इन इंडिया’ का स्वागत किया था। यह अभिनव और नई आकांक्षा पैदा करने वाला था लेकिन दुर्भाज्ञ से ऐसा लगता है कि घोषणा से पहले इसके लिए कोई तैयारी नहीं की गयी और बाद में भी कोई नीतिगत बदलाव नहीं हुए और मेक इन इंडिया एक खोखला नारा बन कर रह गया।”

Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.

Send this to a friend