80 हजार गड्ढ़े खोदेे पर मजदूरी को तरसे


श्योपुर: मजदूरों के भुगतान के मामले में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कितने लापरवाह हैं। इसकी एक छोटी सी वानगी शहडोल एवं उमरिया से आए उन मजदूरों से मिली है,जो एक माह से अधिक के समय में रामबाड़ी प्लांटेशन में 80 हजार से अधिक गड्ढे खोद चुके हैं, लेकिन विडंबना की बात यह है कि अभी तक उन्हें एक रुपए का भुगतान नहीं हुआ है। जबकि भुगतान का नियम एक सप्ताह में करने का है।

भुगतान नहीं होने के चलते मजदूर परिवारों ने डिवीजन में आकर डीएफओ का घेराव करते हुए अपनी व्यथा सुनाई। डीएफओ ने मातहतों को तत्काल भुगतान के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार श्योपुर में मजदूरों की कमी के चलते वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी किसी तरह शहडोल एवं उमरिया के करीब एक सैकड़ा मजदूर लेकर लाए थे। मय परिवार के आए। इन मजदूरों ने रामबाडी प्लांटेशन में 80 हजार से अधिक गड्ढे खोद दिए हैं, किन्तु उनको पेमैंट एक गड्ढे का नहीं हुआ है। जबकि शासन के नियमानुसार 7 दिन में मजदूरों का भुगतान वाऊचर के माध्यम से हो जाना चाहिए, किन्तु रेंजर डीआर नाफित,नाकेदार गुलाबचंद वंशकार सहित ठेकेदार सुशील की लापरवाही एवं भ्रष्टाचार के चलते मजदूर अपनी मजदूरी के एक-एक पैसे के लिए मोहताज बने हुए हैं।

मजदूरों का कहना है कि हमारे पास जितने पैसे,गेहूं इत्यादि थे,वे खत्म हो गए हैं। वर्तमान में उनके पास खाने के लिए एक दाना नहीं है। परिणामस्वरूप बच्चे भूखे मर रहे हैं, किन्तु विभागीय अधिकारी पेमैंट के नाम पर खुलेआम लापरवाही कर रहे हैं। इससे खफा मजदूरों ने डीएफओ कार्यालय आकर न केवल डीएफओ का घेराव किया, बल्कि डिवीजन में ही डेरा डाल दिया। मजदूरों का कहना है कि जब तक हमारा भुगतान नहीं हो जाता,तब तक हम यहां से नहीं जाएंगे। मामले की गंभीरता को भांपते हुए डीएफओ सीएस निनामा ने अधीनस्थों को तत्काल मजदूरों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

पहली बार श्योपुर आए थे मजदूर: शहडोल एवं उमरिया के मजदूरों का कहना है कि हम शिवपुरी तक तो अक्सर मजदूरी करने आते रहते थे, लेकिन श्योपुर जिले में पहली बार आए हैं, किन्तु यहां के अधिकारियों ने हमारा भुगतान रोककर हमारा श्योपुर आने से मोहभंग कर दिया है। एक बार हमारा भुगतान हो जाए तो हम आज के बाद कभी श्योपुर नहीं आएंगे।

भ्रष्टाचार की आ रही बू!: जानकारों का मानना है कि भुगतान रोकने में विभागीय अफसरों की लापरवाही तो है ही। साथ ही भ्रष्टाचार की भी बू आ रही है। मैदानी अमले के एक कर्मचारी के अनुसार अगर कम गड्ढों की मानिटरिंग होगी तो मानिटरिंग सही होगी। यदि गड्ïढे ज्यादा खुद जाएंगे तो उनकी सही तरीके से मानिटरिंग नहीं हो पाएगी।

ऐसे में विभागीय जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी कम गड्ïढों को ज्यादा बतार अतिरिक्त भुगतान प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि अधिक गड्ïढों की सही तरीके से न तो मॉनिटरिंग हो पाएगी और न ही अधिकारी इतने गड्ïढों की मॉनिटरिंग कर पाएंगे। ऐसे में एक अनुमान के मुताबिक गड्ढे दर्शाकर ज्यादा भुगतान प्राप्त कर लिया जाएगा। डीएफओ सामान्य वन मंडल सीएस निनामाजब तक कि गड्ढों की मॉनिटरिंग नहीं हो जाती। इस प्रक्रिया में टाइम लगता है। अब भुगतान की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। संबंधित मजदूरों के खातों में पैसा ट्रांसफर करना चालू कर दिया गया है।