जीएसटी के विरोध में बंद रहे कारोबारी संस्थान


इंदौर : केंद्र के एक जुलाई से प्रस्तावित वस्तु और सेवा कर जीएसटी की विसंगतियों और जटिलताओं के विरोध में मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के अलग-अलग वाणिज्यिक संगठनों की ओर से आज आहूत बंद का खासा असर देखा गया। बाजार सूत्रों ने बताया कि एक दिवसीय बंद के दौरान शहर के हजारों कारोबारियों ने कोई कामकाज नहीं किया। राजबाड़ा क्षेत्र के विभिन्न बाजार, सियागंज का किराना बाजार, संयोगितागंज की अनाज मंडी और सर्राफा बाजार समेत प्रमुख कारोबारी केंद्र वीरान रहे। इससे करोड़ों रुपए का दैनिक व्यवसाय ठप्प हो गया। हालांकि, अन्य इलाकों में खुदरा कारोबार की कई दुकानें बंद के बावजूद खुली रहीं। पैट्रोल पम्पों, अस्पतालों, दूध व दवाई की दुकानों और स्कूल-कॉलेजों को बंद से मुक्त रखा गया था। शहर के कारोबारी संगठन जीएसटी के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि आम आदमी की रोटी, कपड़ा और मकान की चीजों पर जीएसटी की ऊंची दरों और नई कर प्रणाली की जटिलताओं तथा विसंगतियों से उनका कारोबार चौपट हो जाएगा। लिहाजा सरकार को जीएसटी को लागू करने से पहले इसमें जरूरी सुधार करने चाहिए। प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया के साथ यहां बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों के करीब 50 कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा था कि वाणिज्य जगत के हितों की रक्षा के लिए सीमेंट, फ्लोर टाइल्स, नमकीन उत्पादों, घी, ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड कपड़ों, दवाओं आदि वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटाए जाने की जरूरत है। मलैया ने कारोबारी संगठनों को भरोसा दिलाया था कि वह उनके सुझावों को प्रस्तावों की शक्ल में जीएसटी परिषद की 18 जून को होने वाली बैठक में रखेंगे। वित्त मंत्री ने कारोबारीसंगठनों से अपील भी की थी कि वे जीएसटी को लेकर आज बुलाया बंद स्थगित कर दें, लेकिन उन्होंने एक दिवसीय बंद पर अडिग़ रहने का फैसला
किया था।

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