जीएसटी को लेकर असमंजस


इंदौर: वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद मध्यप्रदेश के प्रमुख थोक बाजारों में अलग-अलग चीजों पर इस नयी प्रणाली की दरों व इसके पालन की प्रक्रिया को लेकर असमंजस के बीच आज ग्राहकों की तादाद में कमी दर्ज की गयी।

अहिल्या चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने बताया कि सूबे में जीएसटी को लेकर थोक कारोबारी और ग्राहक, दोनों दिग्भ्रमित हैं। उन्हें अलग-अलग वस्तुओं पर जीएसटी की दरों के बारे में जानकारी नहीं है। इसका बड़ा असर किराना, कपड़ा और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के थोक बाजारों पर दिखाई दे रहा है, जहां मांग के बुरी तरह घटने से सन्नाटा पसरा है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी को समझने में कारोबारियों को हो रही दिक्कत के कारण थोक बाजारों का यह सूरते-हाल कम से कम एक हफ्ते तक कायम रह सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के कारोबारियों में नयी कर प्रणाली को लेकर जागरूकता का भारी अभाव है जिससे वे अगले कुछ दिनों तक थोक बाजारों से खरीदी टालना ही मुनासिब समझ रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा दाल उत्पादक सूबा है।

मध्यप्रदेश दाल उद्योग महासंघ के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी के तहत ब्रांडेड दालों पर पांच फीसद कर लगा दिया गया है, जो पहले इस तरह के किसी कर से पूरी तरह मुक्त थीं। ब्रांडेड दालों को जीएसटी के दायरे में लाये जाने के बाद थोक बाजार में इनके खरीदार पीछे हट रहे हैं, क्योंकि वे नए कर का बोझ नहीं सहना चाहते।

बहरहाल, मध्यप्रदेश र्साफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी ने जीएसटी को देश के हित में बताते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद सूबे के सर्राफा कारोबार पर हालांकि खास असर नहीं है, लेकिन इस नयी कर प्रणाली को अच्छी तरह समझने में कारोबारियों कुछ महीने लगेंगे।

इस बीच, प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग के उपायुक्त (कम्प्यूटर) धर्मपाल शर्मा ने बताया कि उनके विभाग ने गत 15 नवंबर से जीएसटी नामांकन की प्रक््िरऊया शुरू की थी। 25 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में लगभग 3,10,000 पंजीबद्ध इकाइयों में से करीब 2,72,000 व्यापारिक प्रतिष्ठान यह नामांकन कराते हुए नयी कर प्रणाली से जुड़ चुके हैं।

उन्होंने बताया कि सूबे में जीएसटी के नामांकन की प्रक्रिया तेजी से जारी है और कारोबारियों को नयी कर प्रणाली से जोडऩे के लिए आईडी और पासवर्ड जारी किये जा रहे हैं। वाणिज्य कर विभाग अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिये कारोबारियों को नयी कर प्रणाली के बारे में जागरूक भी कर रहा है।

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