जीएसटी: उद्योगपतियों को नहीं मिलेगा रियायतों का लाभ


भोपाल: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मध्यप्रदेश में लागू होने के बाद भले उपभोक्ताओं को कई वस्तुएं सस्ती मिलने लगी हों, लेकिन मध्यप्रदेश में निवेश करने के इच्छुक उद्योगपतियों को मिलने वाली कई तरह की रियायतें और लाभ अब नहीं मिल सकेंगे। इस संबंध में वाणिज्य कर विभाग ने इस संबंध में निर्देश भी जारी कर दिए है।

प्रदेश में मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम प्रभावी होने के बाद मध्यप्रदेश में वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग द्वारा उद्योग संवद्र्धन नीति के अंतर्गत जिन निर्माताओं और व्यवसाईयों को निवेश संवद्र्धन सहायता योजना के तहत वेट और केंद्रीय विक्रय कर की जमा की गई राशि पर छूट के लिए पात्र घोषित किया जाता था और बाद में राज्य के करों में उन्हें छूट दी जाती थी।

एक जुलाई के बाद अब यह छूट बंद कर दी गई है। जीएसटी लागू होने के पहले प्रदेश के उद्योगपतियों को वेट एवं केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम के तहत चुकाए गए कर की प्रतिपूर्ति की जाती थी। अब एक जुलाई से यह प्रतिपूर्ति देना बंद कर दिया गया है। अब वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा जब तक प्रतिपूर्ति और रियायतों के संबंध में जब तक कोई नई नीति जारी नहीं की जाती, तब तक इनका लाभ द्योगपतियों को नहीं मिल सकेगा।

इसी तरह प्रवेशकर अधिनियम अब समाप्त हो गया है। इस अधिनियम के तहत उद्योगों को दी जाने वाली सभी तरह की करमुक्ति के प्रावधान भी समाप्त कर दिए गए है। इसमें बाहर से आने वाली दाल और कई वस्तुओं तथा नए उद्योगों को मिलने वाली प्रवेश कर की छूट अब नहीं मिलेगी।

इसके साथ ही विलासिता कर अधिनियम के तहत पहले प्रदेश की होटलों को तथा नए निवेशकों को छूट दी जाती थी, लेकिन अब इसे जीएसटी में ही शामिल कर लिया गया है।  इसके कारण विलासिता कर से नए निवेशकों को मिलने वाली छूट अब बंद हो गई है। मनोरंजन कर अधिनियम के जीएसटी में शामिल कर लिए जाने के बाद अब सिनेमागृहों और मनोरंजन पार्क को दी जाने वाली छूट के प्रावधान भी अब समाप्त कर दिए गए है।

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