मानवता फिर हुई शर्मसार…


श्योपुर: जिला चिकित्सालय में एक गरीब परिवार की महिला का शव वाहन के इंतजार में दो घंटे तक वार्ड में पड़ा रहा। इस घटना से मानवता एक बार फिर शर्मसार हुई है। जिला अस्पताल में इस तरह की यह दूसरी घटना है। कुछ दिन पहले भी अस्पताल में एक शव घंटों पड़ा रहा था। मिली जानकारी के अनुसार आदिवासी विकास खण्ड कराहल के ग्राम आमेठ निवासी गोपाल आदिवासी की 30 वर्षीय पत्नी के गले में गठान थी, जिसके चलते वह बुधवार को अपनी पत्नी को लेकर जिला अस्पताल आया था, जहां उसने 8.00 बजे के करीब दम तोड़ दिया।

महिला की मौत के बाद उसका पति गोपाल फूट-फूटकर रोने लगा और वह रोते-बिलखते अस्पताल के कर्मचारियों से शव को घर पहुंचाने की गुहार लगाने लगा, लेकिन दो घण्टे तक किसी भी तरह की उसे मदद नहीं मिल सकी और महिला का शव वार्ड में ही पड़ा रहा। हालांकि सूचना मिलने पर जिला अस्पताल पहुंचे एक मीडियाकर्मी ने मानवता दिखाते हुए नपाध्यक्ष को फोन कर शव वाहन अस्पताल बुलाया और शव को घर भिजवाया। वैसे तो प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में शव वाहन नहीं है। लेकिन श्योपुर जिले का स्वास्थ्य विभाग को विजयपुर विधायक रामनिवास रावत विधायक निधि से शव वाहन देने के  इच्छुक हैं।

इसके लिए वे स्वास्थ्य विभाग से कई बार कुटेशन मांग चुके हैं,लेकिन विभागीय अधिकारी शव वाहन लेने में कतई रुचि नहीं ले रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शव वाहन तो मिल जाएगा, लेकिन डीजल, चालक एवं मेंटीनेंस खर्चा कौन उठाएगा?

अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं,नपा का वाहन ढो रहा शव : जिला अस्पताल के पास शव वाहन की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण गरीब पीडि़त परिवारों को जिला अस्पताल में मौत होने के बाद शव को घर ले जाने के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

भला हो नगर पालिका श्योपुर का, जिसके शव वाहन से गन्तव्य तक पहुंचाए जाते हैं। वैसे तो नपा का वाहन महज शहर के लिए है,लेकिन नपा प्रशासन मानवता दिखाते हुए शव वाहन को गांवों तक भेज रहा है।

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