2018 तक हो जाएंगे 350 से अधिक बाघ


भोपाल: मध्यप्रदेश के वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने जानकारी दी है कि छह टाइगर रिजर्व एवं क्षेत्रीय वन मंडलों से प्राप्त हो रहे कैमरा ट्रेप छायाचित्रों के आधार पर वर्ष 2018 में प्रदेश में बाघों की संख्या 350 से अधिक होने का अनुमान है।  यहां प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार डॉ. शेजवार ने यह बात नई दिल्ली में केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा विश्व बाघ दिवस पर विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में बताई।

डॉ. शेजवार ने बताया कि रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में वर्ष 2010 में हुए सम्मेलन में दुनिया में वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने का संकल्प लिया गया था। वर्ष 2010 में मध्यप्रदेश में 257, वर्ष 2014 में 308 बाघ थे। इस प्रकार मध्यप्रदेश आठ वर्षों में बाघों की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए अंतर्राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में भरपूर योगदान दे रहा है।

वर्ष 2014 में मध्यप्रदेश में 286 अलग-अलग बाघों के चित्र कैमरा ट्रेप में मिले थे, जो भारत के किसी भी प्रदेश से मिले बाघ चित्रों में सर्वाधिक थे। डॉ. शेजवार ने विश्व बैंक, यूएनडीपी और केन्द्रीय वन मंत्रालय द्वारा अक्टूबर-2017 में की जा रही ग्लोबल वाइल्ड लाइफ कांफ्रैंस के लिए मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व के चयन के लिए केंद्रीय मंत्री को धन्यवाद भी दिया।

पेंच टाइगर रिजर्व में 18 देशों के प्रतिनिधि फील्ड विजिट के दौरान जनभागीदारी से किये जा रहे वन्य-प्राणी संरक्षण के उत्कृष्ट कार्य देखेंगे। कार्यक्रम के बाद केन्द्रीय वन मंत्री के साथ हुई वन-टू-वन बैठक में मध्यप्रदेश को खरबई और सागर में चिडिय़ाघर-सह-रेस्क्यू सैंटर खोलने के लिए सैद्धांतिक सहमति दी गयी। डॉ. शेजवार ने वन्य-प्राणी अपराधों के अन्वेषण में सहायता के लिए इंडियन टेलीग्राफ एक्ट में राज्यों के वन विभागों को लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसी घोषित करने का भी अनुरोध किया।  इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-प्राणी) जितेन्द्र अग्रवाल और एप्को पर्यटन बोर्ड के कार्यपालन संचालक पुष्कर ङ्क्षसह भी मौजूद थे।

Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.