श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण मिशन को केन्द्र की मिली हरी झंडी


श्योपुर: भले ही केन्द्र की मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजैक्ट स्मार्ट सिटी पर अभी तक शहरों में काम शुरू नहीं हुआ हो, लेकिन इससे पहले सरकार ने गांवों को भी स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। गांवों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की मंशा से केन्द्र सरकार ने श्यामप्रसाद मुखर्जी ग्रामीण मिशन योजना प्रारंभ की है। इस योजना को सरकार ने हरी झंडी प्रदान करते हुए इस दिशा में काम भी प्रारंभ कर दिया है। प्रदेश के चुङ्क्षनदा शहर ही नहीं, बल्कि गांव भी स्मार्ट होंगे। गांवों का समूह (क्लस्टर) बनाकर विकास किया जाएगा।

यह संभव होने जा रहा है केन्द्र की श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण मिशन योजना से। खास बात यह है कि यह योजना केन्द्र की आदर्श सांसद ग्राम से अलग होगी। इससे गांवों के विकास का रास्ता साफ होगा। वहां पर बुनियादी सुविधाएं बढेंग़ी। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने देश के चुनिंदा शहरों को स्मार्ट सिटी के लिए चुना है,जहां शहरों को स्मार्ट बनाने के प्रयास चालू हैं। इसके साथ ही सरकार ने स्मार्ट गांव बनाने की योजना भी लागू कर दी है। योजना के तहत पंचायतों को अतिरिक्त बजट दिया जाएगा।

ताकि वहां पर बिजली, पानी, पक्की सड़कें, सामुदायिक भवन आदि की सुविधाएं विकसित की जा सकें। ग्रामीण विकास के अफसरों का मानना है कि यदि इस योजना पर ईमानदारी से काम हुआ तो यह योजना केन्द्र सरकार की सबसे सफल योजनाओं में से एक होगी, क्योंकि श्योपुर सहित प्रदेश के लगभग सभी गांव इन दिनों बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। 

गांवों को स्मार्ट बनाने बनेंगे क्लस्टर: स्मार्ट गांवों के विकास के लिए समूह (क्लस्टर) बनाए जाएंगे। इनमें 10 से 100 गांव तक शामिल किए जाने प्रस्तावित किया गया है। समतल क्षेत्र में 25 से 50 हजार की आबादी पर तो पहाड़ी व पिछड़े क्षेत्रों में 5 से 15 हजार की आबादी के गांवों को समूह (क्लस्टर) से जोड़कर विकास योजना तैयार की जाएगी। ताकि मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे गांवों को भी शहर की तरह स्मार्ट बनाया जा सके। इस योजना से गांवों के लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार होगा।

पहले चरण में 300 समूह होंगे विकसित: स्मार्ट सिटी की तरज पर स्मार्ट गांव योजना को केन्द्र सरकार ने हरी झंडी प्रदान कर दी है। अब इस योजना की मंजूरी राज्य सरकार से भी ली जाएगी। चूंकि योजना अच्छी है, इसलिए लगता नहीं है कि कोई राज्य सरकार इसका विरोध करेगी। राज्य शासन के हिसाब से ही ग्राम पंचायतों के समूह तैयार किए जाएंगे। पहले चरण में केन्द्र सरकार लगभग 300 समूह विकसित करेगी। इनमें विकास योजना तैयार कराकर उन्हें स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

दो साल में होंगे स्मार्ट गांव विकसित: केन्द्र सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण मिशन के अन्तर्गत चिन्हित गांवों को दो साल में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। वर्ष 2019-20 तक इन्हें विकसित किया जाएगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने 5142.08 करोड़ का बजट मंजूर किया है। चालू वित्तीय वर्ष से ही स्मार्ट गांव योजना पर काम चालू होने की उम्मीद है।

गांवों में सड़क,नाली,पानी जैसी सुविधाओं का अभाव: भले ही गांवों में सीसी रोड बनाई गई हों, लेकिन घरों के गंदे पानी का निकास नहीं होने की वजह से यह सीसी महज दिखावा साबित हो रही हैं। गांवों में सीसी रोड पर बारिश के सीजन में एक से दो फुट तक मलबा जमा है। जिस कारण लोगों को आने जाने में खासी असुविधा हो रही है। स्वच्छ पानी की भी गांवों में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। का कहना है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण मिशन के तहत स्मार्ट गांव बनाने के संबंध में अभी तक कोई विस्तृत दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। वैसे यह योजना अच्छी है इससे गांवों का समुचित विकास हो सकेगा और गांव भी शहर की तरह दिख सकेंगे।

log in

reset password

Back to
log in
Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.

Send this to a friend