पॉलीथिन पर नहीं लग पा रही रोक


श्योपुर: पॉलीथिन कैरी बैग पर प्रतिबंधित संबंधी नोटिफिकेशन जारी हुए ढाई माह गुजर जाने के बाद भी पॉलीथिन पर रोक नहीं लग पाई है। यही वजह है कि 99 प्रतिशत दुकानदार/ग्राहक कैरी बैग का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। विडंबना की बात तो यह है कि जिस नपा व जिला प्रशासन पर प्रतिबंध पर अमल कराने का दायित्व है, उनके अधिकारी इस दिशा में पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। एक बार की कार्रवाई को छोड़कर अभी तक प्रशासन की ओर से दुकानदारों के खिलाफ ऐसी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है,जिससे दुकानदारों में कार्रवाई का खौफ पैदा हो सके। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने मई माह के चौथे सप्ताह के प्रारंभ में कैरी बैग पर प्रतिबंध संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया था।

इसके साथ ही श्योपुर सहित पूरे प्रदेश में कैरी बैग की बिक्री पर बैन लग गया था,मगर इस नोटिफिकेशन को जारी हुए ढाई माह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी बाजार में कैरी बैग का उपयोग बंद होना तो दूर कम तक नहीं हुआ है। यही कारण है कि शहर में सब्जी मंडी से लेकर नाश्ते,मिठाई, दूध डेयरी, जनरल स्टोर, किराना स्टोर, कपड़े की दुकान आदि में पॉलीथिन का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है।

शहर में पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है या नहीं? इस बात की पड़ताल सहित कार्रवाई का दायित्व संयुक्त रूप से नपा व जिला प्रशासन के अधिकारियों पर है,मगर न तो इस दिशा में नपा के अधिकारी गंभीर हैं और न ही प्रशासन के नुमाइंदे। नपा व जिला प्रशासन के अधिकारियों की इस निष्क्रियता का फायदा दुकानदार खूब उठाते हुए आज भी पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं।

उधर दुकानदारों का कहना है कि पॉलीथिन का उपयोग तो सरकार ने बंद कर दिया है,किन्तु इसका विकल्प वह अभी तक नहीं दे पाई है।  पॉलीथिन कैरी बैग का विकल्प क्यों नहीं? पॉलीथिन पर प्रतिबंध की घोषणा सरकार ने छह माह से अधिक समय पहले कर दी थी, लेकिन तब से लेकर अब तक सरकार ने कैरी बैग के विकल्प पर कोई ध्यान नहीं दिया है। यही वजह है कि प्रतिबंध के बाद लोगों को पॉलीथिन के विकल्प का अब तक इंतजार बना हुआ है। ऐसे में पॉलीथिन का प्रतिबंध के बाद भी जमकर इस्तेमाल हो रहा है।

आमजन को मानसिकता बदलने की जरूरत: पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार सरकार ने तो पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन आम लोग अभी तक इसके लिए तैयार नहीं हुए हैं। वे आज भी बिना थैला लिए घर से निकलकर बाजार आ रहे हैं। जबकि होना यह चाहिए कि आम आदमी घर से थैला लेकर आए। आमजन को खुद भी अपनी मानसिकता में बदलाव करना होगा।

सीप नदी में समा रही पॉलीथिन: शहर मे प्रतिबंध के बाद भी बड़े पैमाने पर पॉलीथिन का इस्तेमाल हो रहा है। आलम यह है कि पॉलीथिन सब्जी मंडी,हाथ ठेलों,किराना,मीठ,चाट-पकोड़ी में उपयोग होती हुई नालियों की शोभा बन रही है। एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 50 किलो पॉलीथिन नालियों से निकलती हुई बंजारा डेम व सीप नदी में समा रही है।