सरकारी स्कूलों में शुरू होंगी यूकेजी, एलकेजी कक्षाएं


श्योपुर:सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की दयनीय शैक्षणिक स्थिति को मद्देनजर रखते हुए राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो अगले शैक्षणिक सत्र यानि 2018-19 से यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो नर्सरी कक्षाएं शुरू करने से बच्चों में न केवल बेसिक ज्ञान बढेगा,बल्कि शैक्षणिक गुणबत्ता में भी निखार आएगा। अभी तक निजी स्कूलों में ही नर्सरी,यूकेजी एवं एलकेजी कक्षाएं चलती आ रही हैं। एडमिशन होने के बाद तीन साल तक बच्चा इन क्लासों में इतना मज जाता है कि उसे कक्षा 1 वीं में पहुंचने पर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आती और वह टीचर द्वारा बताई सभी चीजों को अच्छी तरह समझ,लिख और याद कर लेता है। लेकिन यह नर्सरी सिस्टम सरकारी स्कूलों में नहीं है,जिसके चलते इन स्कूलों में पढने वाले बच्चों की नींव प्रारंभिक दौर में ही कमजोर हो जाती है और यह कमजोरी उसे तब अखरती है,जब वह कक्षा 9 वीं में प्रवेश लेता है और अंत में परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाता है।

सरकारी स्कूलों के बच्चों को इस स्थिति से बचाने के लिए अब सरकार शासकीय स्कूलों में भी नर्सरी कक्षाएं चालू करने की तैयारी में है। हालांकि राज्य सरकार पिछले वर्ष इसी महीने दिल्ली में आयोजित केन्द्रीय समीक्षा बैठक में यह प्रस्ताव रख चुकी थी,लेकिन उस प्रस्ताव को अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। पिछले दिनों शिक्षा मंत्री विजय शाह कह चुके हैं कि शिक्षा की गुणबत्ता में सुधार लाने के लिए चौतरफा प्रयास जरूरी हैं। जबकि बेसिक चीजें सीखने के लिए नर्सरी,एलकेजी और यूकेजी जरूरी है। बताया जाता है कि संभवत:अगले शैक्षणिक सत्र से शासकीय स्कूलों में नर्सरी,एलकेजी और यूकेजी कक्षाएं प्रारंभ कर दी जाएंगी।

प्रदेश सरकार शैक्षणिक गुणवत्ता सहित बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 10 वीं तक की शिक्षा को अब आरटीई के दायरे में लाने की कवायद में भी जुटी हुई है। ऐसा होने पर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढे़गा। और वे खुद को प्रायवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से कम नहीं आकेंगे। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो कक्षा 10 वीं तक कोई भी बच्चा फैल नहीं हो सकेगा। देखना यह है कि सरकार की यह पहल धरातल पर कब शुरू होती है?

शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो सरकारी स्कूलों के बच्चों की नींव इसलिए कमजोर होती है,क्योंकि बच्चा सीधा कक्षा 1 वीं में प्रवेश लेता है। इस दौरान वह कक्षा में कभी आता है और कभी नहीं,जिसके चलते उसका बेसिक कमजोर होता चला जाता है। वह न तो कुछ बोल पाता है और न हीं लिख पाता है।

चूंकि सरकारी स्कूल में फैल करने का सिस्टम नहीं है,इसलिए शिक्षक न चाहते हुए भी परीक्षा के दौरान उसे उत्तीर्ण कर देता है और अगले साल वह कक्षा 2 वीं में प्रवेश कर जाता है। जबकि वास्तविक रूप से उसे कुछ भी ज्ञान नहीं होता है। इस तरह बच्चे की नींव कमजोर  हो जाती है।  परिणामस्वरूप कमजोर नींव पर इमारत मजबूत नहीं हो पाती है। इसी कमजोरी को दूर करने के लिए सरकार नर्सरी सिस्टम शुरू करने की तैयारी में है।

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