महाराष्ट्र में हुई EVM से छेड़छाड़, RTI में हुआ खुलासा


चुनाव आयोग भले ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) हैक न होने के दावे कर रहा हो, लेकिन महाराष्ट्र में ईवीएम से छेड़छाड़ की बात साबित हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह खुलासा शनिवार को हुआ है। अनिल गलगली ने आरटीआई के माध्यम से फरवरी में हुए महाराष्ट्र निकाय चुनाव की जानकारी मांगी थी।

गलगली ने कहा, “मतदाता जब भी एक प्रत्याशी को आवंटित चुनाव चिह्न नारियल का बटन दबाते तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चुनाव चिह्न कमल के सामने वाला एलईडी बल्ब जल उठता। निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी, जिसका खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ।”

ईवीएम में मिली गड़बड़ी के बाद निर्दलीय उम्मीदवार आशा अरुण जोरे ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। हालांकि चुनाव अधिकारी ने उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं की। वोटिंग का आधा समय निकल जाने के बाद चुनाव अधिकारी ने ईवीएम में खराबी का हवाला देते हुए पोलिंग बूथ बंद कर दिया। जिसके बाद गलगली ने 16 जून को आरटीआई दाखिल की। उन्होंने बताया कि, जब कई मतदाताओं ने ऐसी ही शिकायत की तब जाकर निर्वाचन अधिकारी ने अपराह्न 1.30 बजे इसका संज्ञान लिया और कार्रवाई करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट से सहमति ली।

गलगली ने कहा, “इस मामले से साबित हो गया कि ईवीएम में छेड़छाड़ संभव है। एक मतदाता ने पहली बार इस ओर ध्यान दिलाया, जिसके बाद कई मतदाताओं ने इसकी पुष्टि की और निर्वाचन अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने शिकायत का सत्यापन कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी।”

उन्होंने कहा कि इस पर भी सबसे चौंकाने वाली बात है कि निर्वाचन आयोग लगातार ईवीएम में छेड़छाड़ की संभावना को नकारता रहा है और यहां तक कि राजनीतिक दलों को ईवीएम से छेड़छाड़ की चुनौती भी दी। गलगली का कहना है कि चुनाव आयोग कैसे ईवीएम को पूरी तरह से सही बता सकता है जब इस तरह की घटनाएं हो रही है। भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए चुनाव आयोग को कोई अन्य विकल्प खोजना चाहिए।

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