वेंकैया के कर्ज माफी की मांग फैशन बना बयान पर विवाद


मुंबई : केंद्रीय शहरी विकास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री एम। वेंकैया नायडू के उस बयान से आज विवाद उत्पन्न हो गया जिसमें उन्होंने कहा कि कर्ज माफी की मांग फैशन बन गयी है और यह किसानों की समस्या का अंतिम समाधान नहीं है। हालांकि अपनी टिप्पणी पर विवाद होने की आशंका को देखते हुए केन्द्रीय मंत्री ने बाद में सफाई भी दी। श्री नायडू ने बम्बई स्टॉक एक्सचेंज के एक कार्यक्रम कर्ज माफी को लेकर कहा है अब इसकी मांग करना फैशन बन गयी है।

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कर्ज लेने के बाद तुरंत कर्ज माफ करने की मांग की जाती है। किसानों को कर्ज माफी में छूट जरूर दी जानी चाहिए लेकिन विषम परिस्थितियों में ही। कर्ज माफ करना किसानों की समस्या का अंतिम समाधान नहीं बल्कि अस्थाई समाधान है। श्री नायडू का यह बयान केन्द्रीय वित मंत्री अरुण जेटली के किसानों के कर्ज को माफ करने से इंकार करने के बाद आया है। श्री जेटली ने कहा है कि किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा करने से देश पर वित्तीय बोझ बढ़ जायेगा। श्री नायडू के इस बयान की भारतीय जनता पार्टी के केन्द और महराष्ट्र में सहयोगी दल शिव सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एवं कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है।

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राकांपा ने श्री नायडू के बयान का कड़ा विरोध करते हुए कहा किसानों की कर्जमाफी पर मंत्री का यह बयान गरीब किसानों के प्रति उनकी मानसिकता को दर्शाता है। उनका यह बयान किसानों का अपमान है। शिव सेना की मनीषा कयांदे ने कहा भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्ता में आने के बाद अपना असली रंग दिखा रहे हैं। इसके पहले हम देख चुके हैं कि इस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किसानों के खिलाफ किस तरह की टिप्पणी कर चुके हैं। अब वेंकैया नायडू किसानों की कर्जमाफी को लेकर ऐसा बयाान दे रहे हैं। यह बेहद दुखद है कि इस तरह के बयान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की ओर से आ रहे हैं।

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने श्री नायडू के बयान को असंवेदनशील करार देते हुए कहा कि किसान कठिन परिस्थितियों में ही आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अब तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े राज्यों ने किसानों के करोड़ों रुपये की कर्ज माफी की घोषणा कर दी है।इस बीच श्री नायडू ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि इसका गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उनका मानना है कि ऋण माफी समस्या का अंतिम समाधान नहीं है, यह अस्थायी विकल्प मात्र है।

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श्री नायडू ने दिल्ली में हुडको और ईपीएफओ के बीच एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद अलग से संवाददाताओं द्वारा पूछे गये एक प्रश्न पर यह बात कही। उन्होंने कहा मैंने बम्बई स्टॉक एक्सचेंज के एक कार्यक्रम में आज ही कहा है कि ऋण माफी की मांग अब फैशन बन चुकी है लेकिन यह अंतिम समाधान कतई नहीं है। ऋण माफी केवल विषम परिस्थितियों में ही होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा किसानों को उनकी फसल की अच्छी कीमत मिलनी चाहिए और उन किसानों की भी मदद की जानी चाहिए जो भारी संकट में हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि हमें उनके लिए पर्याप्त मूलभूत ढांचा तैयार करना चाहिए। उन्हें गोदाम, शीतगृह, रेफिजरेटर वैन और ऐसी ही कई अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।

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