राणे ने 800 करोड़ की सरकारी जमीन मुफ्त क्यों दी?


मुंबई : मुंबई के मालाड पश्चिम मालवाणी क्षेत्र में सरकार के तकरीबन चार एकड़ के भूखंड को अवैध तरीके से कब्जाने के मामले में जिस तरह से पद व अधिकार का दुरुपयोग किया गया, वह सचमुच हैरान कर देने वाला है क्योंकि इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व राजस्व मंत्री नारायण राणे पर उंगलियां उठ सकती हैं जिनके आदेश पर यह सरकारी भूखंड वॉल्टर रेमंड पटेल के वारिसों को दिया गया जिसके चलते पटेल के वारिस को 800 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।

गौरतलब है कि यह वही भूखंड है जिस पर बोरीवली के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले लोगों को स्थानांतरित करने का आदेश मुंबई उच्च न्यायालय ने वर्ष 2000 में दिया था लेकिन जिला अधिकारी ने इस भूखंड पर सांताक्रूज स्थित गजधर बांध के नालों को चौड़ा करने की परियोजना के दौरान प्रभावित नागरिकों का पुनर्वास करने का आदेश म्हाडा को दिया था। आरटीआई के माध्यम से इस बात का खुलासा हुआ है कि नारायण राणे के समक्ष म्हाडा प्रशासन और जिला अधिकारी द्वारा तमाम दलील सुनाने के बावजूद राणे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एकतरफा फैसला लिया।

और जिला अधिकारी को अपने आदेश पत्र पर हस्ताक्षर कर इस सरकारी भूखंड को वॉल्टर रेमंड पटेल के वारिस को देने को कहा। इतना ही नहीं, राणे ने अपने आदेश पत्र में कहा है कि मैं राज्य का राजस्व मंत्री होने के नाते जो कह रहा हूं वही सच व तथ्यपूर्ण है। इसलिए मेरे आदेश का पालन किया जाए और वह भूखंड वॉल्टर रेमंड पटेल के वारिस को बिना उसके दस्तावेज की जांच किए उसे दिया जाए। अब इस मामले में सवाल यह उठ रहा है कि राज्य के जिम्मेदार पूर्व राजस्व मंत्री नारायण राणे ने सरकार के राजस्व और मुंबई के गरीब लोगों के हित में विचार न करते हुए भूमाफिया वॉल्टर रेमंड पटेल के वारिस को 800 करोड़ रुपये की जमीन मुफ्त में क्यों दी? इस बात का खुलासा होना जरूरी है।

 

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