मायावती का इस्तीफा राज्यसभा से मंजूर, दोबारा लिखनी पड़ी थी चिट्ठी


नयी दिल्ली :  बीएसपी प्रमुख मायावती का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। मायावती ने आज राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से मुलाकात की है और उन्हें अपने इस्तीफे की दूसरी कॉपी सौंपी। जिसके बाद उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। तब मायावती ने आरोप लगाया था कि राज्यसभा में उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। दरअसल इससे पहले तीन पेज का अपना इस्तीफा उन्होंने सभापति से मिलकर दिया था लेकिन उस पर फैसला नहीं हो पाया। उसकी वजह यह बताई गई कि उनके द्वारा दिया गया इस्तीफा तयशुदा प्रारूप में नहीं था। इसलिए मायावती को दूसरी बार एक लाइन में अपना इस्‍तीफा तयशुदा रूप में देना पड़ा। जिसको स्‍वीकार कर लिया गया।

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चेयरमैन ने मायावती का पहला इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था

राज्यसभा के चेयरमैन ने मायावती का पहला इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था और उनसे सदन में लौटने को कहा था, लेकिन मायावती ने लौटने के बजाय दोबारा इस्तीफा लिखकर देना बेहतर समझा। इससे पहले कांग्रेस और अन्य दलों ने मायावती से अपने इस्तीफे पर पुर्नविचार करने को कहा था।

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सहारनपुर में दलित विरोधी हिंसा के विरोध में दिया था इस्तीफा

बता दें कि बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने 18 जुलाई को राज्यसभा में सहारनपुर में दलित विरोधी हिंसा के मुद्दे पर आसन द्वारा उनको पूरी बात कहने की अनुमति नहीं दिये जाने के कुछ ही घंटों बाद उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

मायावती ने सोमवार शाम को राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से मिलकर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंप दिया। हालांकि मायावती का ये इस्तीफा राज्यसभा सचिवालय ने मंजूर नहीं किया। इस्तीफे के सही प्रारूप के अनुसार त्यागपत्र संक्षिप्त होना चाहिए और इसमें कारणों का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए।

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18 जुलाई को सदन में क्या हुआ था ?

18 जुलाई के घटनाक्रम के मुताबिक जब राज्यसभा में मायावती ने बोलना शुरू किया तो उन्हें उपसभापति पी जे कुरियन ने नियमों के तहत बोलने को कहा। इससे नाखुश बसपा प्रमुख ने कहा, ‘मैं आज राज्यसभा से इस्तीफा दे दूंगी। मायावती का राज्यसभा में वर्तमान कार्यकाल अगले वर्ष अप्रैल में समाप्त होने वाला था।’

मीडिया में वितरित उनके इस्तीफे में मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि उन्हें दलितों के मुद्दे पर उच्च सदन में बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, ‘जैसे ही मैंने अपनी बात सदन के समक्ष रखनी शुरू की, सत्ता पक्ष की ओर से उनके संसद सदस्यों के साथ मंत्री गण भी खड़े हो गये और अवरोध उत्पन्न करने लगे।’

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