काजीरंगा में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे असम सरकार


नई दिल्ली, (भाषा): राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने काजीरंगा राष्ट्रीय अभयारण्य में सड़क हादसों में कई पशुओं की मौत के मामले में आज असम सरकार को आड़े हाथ लिया और उसे खासकर मानसून के मौसम में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। एक सींग वाले गैंडों के लिए प्रसिद्ध इस अभयारण्य के पास सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम सरकार को बाढ़ के दौरान पशुओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, रोजाना सड़क हादसों में पशु मारे जा रहे हैं। आपके यातायात सेंसर क्या कर रहे हैं? हमें बताइए कि सेंसर इन पशुओं की सुरक्षा क्यों नहीं कर पा रहे। सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने हरित अधिकरण को सूचित किया कि उसने काजीरंगा नेशनल पार्क की दक्षिण सीमा के पास से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर तेज गाड़ी चलाने और ओवर-लोडिंग के मामले में 10 जुलाई तक 1010 चालान किये हैं।

असम सरकार के वकील ने एनजीटी को बताया कि जिस पट्टी में सेंसर संचालित स्वचालित यातायात बैरियर लगाये गये हैं, वहां एक भी पशु नहीं मारा गया है। अधिकरण वन्यजीव कार्यकर्ता रोहित चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने अभयारण्य के पास से जाखलाबांध से बोकाखाट तक एनएच-37 को चौड़ा करने का विरोध किया। याचिकाकर्ता की ओर से वकील रित्विक दत्ता ने आरोप लगाया कि पिछले 10 दिन में सड़क दुर्घटनाओं में नौ हॉग डियर मारे गये। उन्होंने कहा कि इन पशुओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी हैं।