कोलकाता हाईकोर्ट ने केन्द्र को डांट लगाई


कोलकाता, (भाषा): न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी को लेकर केन्द्र को डांट लगाते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय ने इस दिशा में कदम नहीं उठाये जाने पर समुचित कार्रवाई की चेतावनी देते हुए सवाल किया कि क्या देश यह सोच सकता है कि संसद अपनी आधी संख्या के साथ काम कर सकती है। अदालत ने कहा, उनकी संख्या में भारी कमी को लेकर चिंता जताये जाने के बावजूद न्यायाधीशों की नियुक्ति पर केन्द्र की लगातार चुप्पी को निश्चित रूप से न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप के रूप में गंभीरता से लिया जाएगा।

यह रेखांकित करते हुए कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 72 पद होने के बावजूद महज 24 नियुक्तियां हुई हैं, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति डी.पी. डे की खंड पीठ ने कहा, न्यायिक प्रणाली को ध्वस्त होने से बचाने के लिए अधिकमत संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति की दिशा में काम करने की जरूरत है। प्रणाली ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गयी है। पीठ ने कहा, वर्तमान में यह अदालत सिर्फ 34 न्यायाधीशों के साथ काम कर रही है। ऐसे में मौजूदा संख्या, स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 प्रतिशत से थोड़ा ही कम है।