नागालैंड के सीएम, राज्यपाल के बीच टकराव, राजनीतिक संकट गहराया


नयी दिल्ली : नागालैंड में राजनीतिक संकट गहरा गया है और मुख्यमंत्री एस लाईजेत्सु तथा राज्यपाल पी आचार्य के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। पिछले तीन दिनों में यह दूसरी बार है जब राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को संवैधानिक मानकों का पालन करते हुए सदन में अपना बहुमत साबित करने को कहा है।

सूत्रों के अनुसार कल शाम राज्यपाल ने एक बयान में कहा “प्रथम द्वष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे मुख्यमंत्री ने सदन में सदस्यों का समर्थन खो दिया है।” इसमें कहा गया है कि इसे देखते हुए शनिवार 15 जुलाई को विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाकर उन्हें अपना बहुमत साबित करना चाहिए। यह बयान इस नजरिए से भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्यमंत्री ने 11 जुलाई को राज्यपाल के बहुमत साबित करने संबंधी निर्देश को यह कहकर खारिज कर दिया था कि अगामी प्रथम विधानसभा सीट पर 29 जुलाई को उपचुनाव होगा। राज्यपाल ने 11 जुलाई को मुख्यमंत्री को निर्देश दिया था कि वह 15 जुलाई को सदन में अपना बहुमत साबित करें।

राज्यपाल ने इस पूरे घटनाक्रम से पहले ही नयी दिल्ली को अवगत करा दिया था कि मुख्यमंत्री की ओर से बहुमत साबित करने की मांग को खारिज किए जाने को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। इस बात के भी संकेत है कि या तो मुख्यमंत्री राज्य विधान सभा के सत्र को बुलाने की सिफारिश कर सकते हैं या फिर उन्हें हटना पड़ सकता है।

इस बात मे कोई संदेह नहीं हैं कि श्री आचार्य मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं अथवा विद्रोही खेमे के नेता टी आर जेलियांग को वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं या फिर राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर सकते है । लेकिन राष्ट्रपति शासन के विकल्प की संभावना नहीं के बराबर है।

पूर्व मुख्यमंत्री श्री जेलियांग के भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ संबंध काफी अच्छे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि केन्द्रीय नेतृत्व नागालैंड के राजनीतिक संकट को सुलझाने के लिए काफी उत्सुक है क्योंकि 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होना है और इससे पहले ही इस मसले का समाधान किए जाने के पक्ष में हैं। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में असंतुष्ट नेता 41 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) राज्य तथा केन्द्र में भाजपा का सहयोगी है और यह गुट भी तीन भाजपा विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है।

श्री लाइजेत्सु ने 22 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और वह फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। राज्य में वर्ष 2015 के बाद एनपीएफ मंत्रालय को टक्कर देने वाला यह चौथा राजनीतिक संकट है। इस बीच विद्र्राेही खेमे के प्रवक्ता तोहिहो येपथोमी ने कहा कि श्री लाइजेत्सु पर्याप्त विधायक नहीं होने के कारण सदन में बहुमत साबित करने से बच रहे हैं।

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