पाकिस्तान को काबू करेगा “नाग”


जयपुर: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार को (13 जून) टैंक भेदी मिसाइल ‘नाग’ का राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र के रेगिस्तान में सफल परीक्षण किया। रक्षा सूत्रों ने बताया, “मिसाइल ने आज के मिशन में लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया”।

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इस अत्याधुनिक मिसाइल के परीक्षण के मौके पर डीआरडीओ, रक्षा प्रयोगशाला (जोधपुर) के वैज्ञानिक, शस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य लोग उपस्थित थे।रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार जी सतीश रेड्डी ने कहा कि इस सफल परीक्षण से देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिली है। डीआरडीओ के प्रमुख डॉक्टर क्रिस्टोफर ने मिशन का हिस्सा रही टीम को बधाई दी।

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रक्षा सूत्रों के मुताबिक 3 में से 2 परीक्षण में ‘नाग’ मिसाइल अपने लक्ष्य को भेदने में सफल रहा, जबकि 1 निशाना चूक गया। 7 किलोमीटर के दायरे में लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए मिसाइल का परीक्षण किया गया था। इससे पहले तीसरी पीढ़ी की इस मिसाइल का परीक्षण चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया गया था। 8 जुलाई 2013 को इस श्रृंखला के मिसाइल का पोकरण में परीक्षण किया गया था।

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पाकिस्तान सीमा के पास पोखरण फायरिंग रेंज में इस मिसाइल का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी फायरिंग रेंज में अमेरिका से खरीदी गई यूएवी होवित्जर तोपों का परीक्षण भी इन दिनों चल रहा है। मिसाइल नाग के परीक्षण के दौरान डीआरडीओ और सेना के अधिकारी मौजूद हैं।

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नाग की खासियत
– मिसाइल को दागे जाने के बाद रोक पाना असंभव ।
– नाग मिसाइल का वजन करी 42 किलोग्राम ।
– 8 किलोग्राम विस्फोटक के साथ 4 से 5 किमी तक मार कर सकती है।
– नाग मिसाइल की गति 230 मीटर प्रति सेकेंड।
– दागे जाने के तुरंत बाद धुआं नहीं निकलता है।
– दुश्मन को जानकारी नहीं मिल पाती है।
– 10 साल तक बगैर किसी रखरखाव के किया जा सकता है इस्तेमाल ।

 

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