वल्ला मेडिकल विश्वविद्यालय में मांसाहारी भोजन परोसने का मामला पहुंचा श्री अकाल तख्त साहिब


लुधियाना-अमृतसर  : शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधों के अधीन चल रहे श्री गुरु राम दास इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंस व विश्वविद्यालय की कंटीन व मैस में मासाहारी भोजन परोसे जाने के मामले में एसजीपीसी के अध्यक्ष प्रो $किरपाल सिंह बडूंगर के खिलाफ पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव व प्रवक्ता मनदीप सिंह मन्ना ने मंगलवार को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को शिकायत सौंपी।

सिंह साहिब को सभी सबूतों के साथ सौंपी गई चार पेज की लिखित शिकायत पत्र में मांग की गई है कि इस मामले में एसजीपीसी के अध्यक्ष प्रो किरपाल सिंह बडूंगर , एक एसजीपीसी के सदस्य , एक अकाली दल के सदस्य और सिख धर्म की पुस्तकें प्रकाशित कर बेचने वाले एक पब्लिशर के पुत्र को सिख धर्म की मर्यादाओं का उल्लंघन करने के कारण श्री अकाल तख्त साहिब पर तबल करके धर्म के नियमों के अनुसार तनखाईया घोषित किया जाए। उधर सिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह सारे मामले की सुनवाई कर आश्वासन दिया कि इस मामले को वे पांच सिंह साहिबान की होने वाली अगली बैठक में विचार करेंगे। इस गंभीर मामले पर पांच सिंह साहिबान जो भी फैसला लेंगे उसके अनुसार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को शिकायत सौंपने के बाद मीडिया के साथ बातचीत करते हुए मनदीप सिंह मन्ना ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मर्यादा नियम अपने पदाधिकारियों और दूसरों के लिए अलग अलग है। अपने स्वार्थों और पैसे की दौड़ के लिए एसजीपीसी के अधिकारी खुलेआम पंथक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ा कर अपनी जेबें भरने की आड़ मेें धर्म का सहारा लेकर आम श्रद्धालुओं को धोखा देते हुए खुलेआम गुरु की गोलक की लूटपाट कर रहे है।

एसजीपीसी के संस्थान मेडिकल इस्टीच्यूट वल्ला में एसजीपीसी के अध्यक्ष प्रो किरपाल सिंह बडूंगर की मूक सहमति से एक एसजीपीसी पदाधिकारी और अकाली दल का नेता अपनी जेब भरने के लिए मीट, मछली आदि की दुकान चला रहे है। जो सिख धार्मिक मर्यादा का घोर उल्लंघन है। संस्थान की कंनटीन और मैस मेें विद्यार्थियों को मीट, मछली, मुर्गा , बकरा और सुअर आदि का मास सिख धर्म मर्यादा के खिलाफ विस्तृत हा रहा है। इस मामले को संगत की मांग को मुख्य रख सबूतों समेत , वीडियो फिल्म के माध्यम से उनकी ओर से कुछ दिन पहले खुलासा किया गया था। जिस पर एसजीपीसी के अध्यक्ष प्रो बडूंगर ने जानकारी न होने का बहाना लगा कर चुप्पी धारण की रखी। मीडिया के पूछने पर कहा कि इस संबंधी फैसला सिर्फ सिंह साहिब ही कर सकते है।

मन्ना ने कहा कि इस मामले में संस्था के डा एपी सिंह और डा गीता शर्मा ने सिख धर्म और मर्यादा विरोधी ब्यान देकर कहा था कि विद्यार्थी मांग करते है इस लिए उनको उक्त वस्तुएं उपलब्ध करवाई जाती हैँ जबकि हड्डी रोगों के पीडि़त रोगियों को तो उक्त अस्तपाल में मासाहारी सूप भी पीने नहीं दिया जाता। को कंटीन व मैस में मासाहारी भोजन पदार्थ क्यों बेचे जाते है। जबकि कंटीन की इमारत भी कार सेवा वाले संत महा पुरूषों की ओर से की गई थी। क्या अब सिखों के मामलों में जो जवाब सिंह साहिब के अधिकार क्षेत्र में देने बनते है वह ब्यान अब डा एपी सिंह और डा गीता शर्मा देंगे।

जिक्रयोग है इस संस्थान के अंदर ही मांसाहारी समान बेचने वाली कंटीन के पास ही गुरूद्वारा साहिब भी है। यहां हर रोज श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश होता है। गुरुद्वारा साहिब की दीवार के साथ ही एक कंटीन बनाई हुई है। इस संस्थान की सहायता भी गुरुघर की गोकल से जाती है।

– सुनीलराय कामरेड

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