लोहा व्यापारियों की हड़ताल समाप्त


लुधियाना- मंडी गोबिंदगढ  : गत सोमवार से मंडी गोबिंदगढ़ के अमलोह रोड चौक पर चल रहा लोहा व्यापारियों का अनिश्चितकालीन धरना एवं हड़ताल पांचवें दिन में प्रवेश करने उपरांत तमाम कोशिशों के बाद संपन्न हो गई। ये धरना वीरवार शाम को ही संपन्न हो जाना था किंतु कुछ उद्योगिक ईकाईयों के मालिकों द्वारा जीएसटी पर लोहा व्यापारियों को डेढ़ प्रतिशत कमीशन ना देने की किाद पर अड़े हुए थे और इस बारे कई बैठकें भी हुई जिस पर सबकी एक राय नहीं बन पा रही था। इसके अलावा बड़ी मिलों मालिकों ने फिलहाल ईंगट और बिल्ट पर अभी फैसला लेना बाकी है। इससे पहले व्यापारियों ने आज सुबह मेन बाजार, अमलोह रोड, मोतिया खान इलाके में जाकर रोष प्रदर्शन किया था और दुकानदारों से उनकी दुकान की चाबियां मांग रोष स्वरूप दुकानें बंद करवाई थीं।

इस धरने को समाप्त करवाने में मंडी गोबिंदगढ़ के सारे कारोबारियों की पुरानी एवं गर्वनिंग बाडी स्टील चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन भारत भूषण टोनी, अध्यक्ष मनमोहन सिंह मांगट, कोषाध्यक्ष के.के.जिंदल का अहम योगदान रहा। जिन्होंने आल इंडिया स्टील री-रोलर्स एसोसिएशन (आईसरा), स्माल-स्केल री-रोलर्स एसोसिएशन (स्मासरा), भाव नगर ट्रैडर्स एसोसिएशन, स्क्रैप ट्रैडर्स एसोसिएशन, पाईप प्लांट एसोसिएशन के पदाधिकारियों से लगातार संपर्क में थे कि धरना कैसे समाप्त करवाया जाए।

धरना स्थल पर शाम चार बजे पहुंचे विनोद वशिष्ट, मनमोहन सिंह मांगट और स्मासरा के राजीव सूद ने खुद धरनाकारियों को जीएसटी पर डेढ़ प्रतिशत कमीशन देने की घोषणा की और व्यापारियों की घोषणा का तालियों से स्वागत किया और स्टील ट्रैडर एसोसिएशन अध्यक्ष विनोद कांसल, कोषाध्यक्ष राजीव सिंगला, कानूनी सलाहकार एडवोकेट जगमोहन डाटा, रविंदर सिंह पद्म, ऊंकार सिंह, सुखदेव मिड्ढा, श्रीनिवास गोयल, सज्जन गोयल, विमल महावर, मुनीश कांसल, तेजिन्द्र ढंड, रजिन्द्र करेसिया, शशी जोशी, विनोद गोयल, संजय गर्ग, अशोक बत्ता, दीपक कुमार, अरुण कुमार, विवेक सिंगला व दीनेश गुप्ता आदि सदस्यों का लड्डूओं से मुंह मीठा करवाकर धरना समाप्त करवाया गया। इस दौरान आईसरा उपाध्यक्ष हरमेश जैन, स्मासरा से राजन गर्ग, प्रदीप भल्ला, दर्शन सिंह नलास समेत अन्य लोहा कारोबारी मौजूद थे।

इससे पहले स्टील चैंबर अध्यक्ष मनमोहन सिंह मांगट ने धरनकारियों को कहा कि अपने हक के लिए आवाज उठाना सभी का हक है किंतु बिना दुख बताए धरने पर बैठ जाने से जहां कारोबार प्रभावित होता है वहीं आपसी मसले भी उलझ जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्टील चैंबर का आज से ये विधि विधान सब समझ लें कि अगर कोई भी एसोसिएशन या लोहा कारोबारी जिसे कोई दिक्कत पेश आए पहले वह बैठकर उसका स्थाई हल खुद निकाले। स्टील चैंबर सभी एसोसिएशन का सांझा परिवार है अगर किसी ने बिना बताए चौक में धरना लगाया तो चैंबर समेत कोई भी एसोसिएशन उसका साथ नहीं देगी।

कैसे समाप्त हुआ धरना क्या मिला आश्वासन
शाम करीब चार बजे धरनास्थल पर उक्त सभी एसोसिएशनों के अध्यक्ष एकत्रित हुए और बड़ी संजीदगी से लोहा व्यापारियों से आपसी व्यापार की सांझ को बढ़ाते हुए फैसला लिया कि धरना लगाना किसी चीज का हल नहीं है अपितु इससे कारोबार प्रभावित होतें है। मंच से आईसरा अध्यक्ष विनोद वशिष्ट ने कहा कि पहले तैयार माल पर विभिन्न तरीकों से 12.5 प्रतिशत एक्साईज लगता था और व्यापारी को बनता डेढ़ प्रतिशत कमीशन दे दिया जाता था, जबकि वैट पर ये कमीशन नहीं दिया जाता था, किंतु जीएसटी लगनेके बाद एक मुश्त टैक्स लगने से व्यापारियों को कमीशन ना देने का फैसला लिया गया था। इस दौरान एक समस्या ये भी रही कि जीएसटी के बाद व्यापारियों और मिल मालिकों के बीच कोई भी मीटिंग नहीं हुई क्योंकि इससे पहले भी जब भी कोई लोहा व्यापार पर कोई समस्या आई है उसे एक मंच पर सुलझाया गया है।

– सुनीलराय कामरेड