सेना के सेवामुक्त कर्नल ने श्री अकाल तख्त साहिब पर लगाई गुहार


लुधियाना-अमृतसर  : दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के प्रसिद्ध शहर बंगलौर में कुछ सियासी आकाओं के इशारों पर स्थानीय गुंडों द्वारा देश की सरहदों पर हिफाजत करने वाले भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल के बेटों पर ना केवल जुल्म ढाएं गए बल्कि उनके केसों की बेअदबी के साथ-साथ इतनी बेदर्दी से मार पिटाई की गई कि एक बेटे के मुंह की हडिडयां भी टूट गई। हालांकि डाक्टरों ने समय पर इलाज करके जवान बेटे के मुंह में प्लेटे डालकर उसे ठीक करने का यत्न किया परंतु जिला पुलिस और सिविल प्रशासन ने दोषी गुंंडों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही ना करते हुए उलटा पीडि़त परिवार को ही धमकाना-डराना शुरू कर दिया। जब यह मामला सिखों की सर्वोच्च ताकत श्री अकाल तख्त साहिब पर पहुंचा तो उनके आदेश उपरांत शिरोमणि कमेटी ने हस्ताक्षेप किया।

श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह के निजी सहायक जसविंद्र सिंह के मुताबिक बंगलौर में सेना के सेवामुक्त भारतीय कर्नल ने कुछ वक्त पहले एक फलैट खरीदा था, हालांकि कुछ समय ठीक ठाक गुजरा परंतु सिख कर्नल के फलैट के साथ एक अन्य फलैट की बिक्री होते ही उनपर मानसिक और शारीरिक तनाव शुरू हो गया। कर्नल के साथ बात-बात पर तूतू- मैंमैं और झगड़ा करने को तैयार रहता था वह। एक दिन तनाव इतना बढ़ा पड़ौसी ने बाहर से गुंडे मंगवाकर जानलेवा हमला कर दिया।

कर्नल परिवार पर जानलेवा इस हमले के दौरान कर्नल के बेटे सुरिंद्र सिंह उप्पल और हरप्रीत सिंह उप्पल गंभीर रूप से जख्मी हुए। दोनों बेटों की गुंडों ने इतनी पिटाई की कि एक बेटे का जबड़ा ही तोड़ दिया गया। कर्नल ने बताया कि उन्होंने इंसाफ के लिए संपर्क पुलिस थाने में गुहार लगाई तो उन्हें पाकिस्तानी और आतंकी कहकर जलील किया जाने लगा। गुंडागर्दी पर उतारू पड़ोसी ने उन्हें फलैट छोड़कर चले जाने का फरमान सुना दिया। उन्होंने बताया कि बेबस होकर इसकी शिकायत शिरोमणि कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब पर की गई तो शिरोमणि कमेटी द्वारा वहां की सरकार और जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया।

करीब 50 दिन बाद मामूली कानूनी धाराओं का इस्तेमाल करते हुए दोषियों को थाने में ही जमानत दे दी गई। हालांकि यह मामला इरादा कत्ल 307 और 326 के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का जिसमें धारा 295ए भी बनता है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई की समस्त तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे के फोटोज श्री अकाल तख्त साहिब पर पहुंच चुकी है और शिरोमणि कमेटी को जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा आदेश जारी किए गए है कि दोषियों के विरूद्ध जरूरी कार्यवाही करके कर्नाटक सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय प्रसिद्ध वकीलों से बातचीत की जाएं ताकि दोषियों को जेल की यात्रा पर भेजकर सिख परिवार के साथ हुई बेइंसाफी की सजा दिलाई जा सकें। उन्होंने यह भी कहा देश में किसी भी सिख के साथ बेइंसाफी नहीं होनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि देश की आजादी की लड़ाई में सिखों ने करीब 86 फीसदी से ज्यादा योगदान दिया है परंतु उन्हें देश के विरूद्ध बताना कदाचिप तर्कसंगत नहीं। उन्होंने कहा कि 1965, 1971 और कारगिल की लड़ाई में सिखों ने अहम योगदान दिया है और बंगलादेश को फतेह करने वाले शबेक सिंह और जरनल अरोड़ा ही थे।

– सुनीलराय कामरेड

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