कश्मीर में हड़ताल से जनजीवन प्रभावित


जम्मू & कश्मीर में आज ही के दिन डोगरा शासन के दौरान 1931 में श्रीनगर केन्द्रीय कारागार के बाहर 22 लोगों मारे गए थे जिसके बरसी पर अलगाववादियों के हड़ताल के आह्वान के मद्देनजर गैर प्रतिबंधित स्थानों पर भी जनजीवन पर असर पड़ा।

इस दौरान श्रीनगर के मुख्य बाजार और शहर-ए-खास में रोक लगाने के बाद भी कल शहर के अन्य क्षेत्रों जैसे सिविल लाइंस के साथ मैसुमा में हिंसा के बचने के लिए एहतियातन कर्फ्यू लगा दिया है।

सिविल लाइंस में वाहनों की आवाजाही पर रोक होने के अलावा दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। वही नगर के बाहरी क्षेत्रों के गैर प्रतिबंधित इलाकों में कुछ प्राइवेट वाहनों के साथ-साथ कैब और ऑटो को चलते हुए देखा जा सकता था।

घाटी में बलिदान दिवस पर सरकारी छुट्टी होने पर सरकारी दफ्तर और बैंक बन्द रहे जबकि शिक्षण संस्थान ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण बंद रहे।

शहर के मुख्य व्यावसायिक इलाकों जिनमें रीगल चौक, हरी सिंह हाई स्ट्रीट, बाटमालू, मौलाना आजाद रोड, रेजीडेंसी रोड और डलगेट पर व्यवसाय और अन्य गतिविधियां भी प्रभावित नजर आ रही थीं।

किसी प्रतिकूल स्थिति से बचने के लिये गैर प्रतिबंधित क्षेत्रों में बुलेट प्रूफ जैकेट पहने और हथियार लिए हुए अतिरिक्त पुलिस बल गश्त करते नजर आये।

घाटी में लगातार दूसरे दिन मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध जारी रहा। सुरक्षा कारणों से ट्रेन सेवा भी निरस्त कर दी गयी।

दोनों दलों हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने डोगरा पुलिस द्वारा मारे गये 22 लोगों की 86वीं बरसी पर हड़ताल का आह्वान किया था।

कश्मीर से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक शहीद दिवस पर मुख्य नगरों और तहसील मुख्यालयों जहां हड़ताल के समर्थन में दुकानें और अन्य व्यावसायिक संस्थान बंद थे, वहां प्रदर्शन रोकने के लिये सैकड़ों सुरक्षा बल और पुलिस कर्मी तैनात कर दिये गये हैं। अप्रिय स्थिति से बचने के लिये सम्पूर्ण दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी है।

 

अलगाववादियों द्वारा बुलायी गयी हड़ताल से बडग़ाम और गंदेरबल जिलों के कई हिस्सों में भी जनजीवन पर असर पड़ा है।