जाधव की मां के वीजा मामले पर सुषमा ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा, दागे कई ट्वीट


नयी दिल्ली : सोमवार सुबह भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी विदेशमंत्री सरताज अज़ीज़ पर जमकर बरसते हुए उन पर उस ‘खत का जवाब देने तक का शिष्टाचार नहीं निभाने’ का आरोप लगाया, जिसमें सुषमा ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव, जिसे पाकिस्तान में मौत की सज़ा सुनाई गई है, की मां को वीसा दिए जाने का आग्रह किया था। हालांकि, उन्होंने अजीज को आश्वासन दिया कि यदि कोई पाकिस्तानी नागरिक भारत आने के लिये उनकी सिफारिश पर मेडिकल वीजा की मांग करता है तो उसे तुरंत वीजा दिया जायेगा।

सुषमा ने कई ट्वीट में कहा, “भारत में अपने उपचार के लिये वीजा की मांग करने वाले सभी पाकिस्तानी नागरिकों के प्रति मेरी सहानुभूति है। हमारे लिये पाकिस्तानी नागरिकों की मेडिकल वीजा को स्वीकृति प्रदान करने से संबद्ध उनकी सिफारिश आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक अवंतिका जाधव का वीजा आवेदन लंबित है, जो पाकिस्तान में अपने बेटे से मिलना चाहती हैं।

 

उन्होंने ट्वीट किया, “पाकिस्तान जाने के लिए उनके (अवंतिका के) वीजा की स्वीकृति के लिये मैंने व्यक्तिगत तौर पर श्रीमान सरताज अजीज को पत्र लिखा। लेकिन श्रीमान अजीज ने मेरे पत्र पर संज्ञान लेने तक का शिष्टाचार नहीं दिखाया।” जाधव (46) को पिछले साल पाकिस्तान के अशांत बलूचितस्तान में कथित तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया था। पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जासूसी एवं आतंकवाद के आरोप में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनायी है।

सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी बच्चे की मदद की थी

भारत ने दिल की बीमारी से जूझ रहे एक पाकिस्तानी बच्चे को मेडिकल जारी कर दिया है। बच्चे की उम्र महज ढाई महीने है। उसके पिता ने 24 मई को सुषमा स्वराज से टि्वटर के जरिए मेडिकल वीजा देने की गुहार लगाई थी। बच्चे के पिता ने सुषमा को शुक्रिया कहते हुए ट्विटर पर बेहद भावुक अंदाज में लिखा- तमाम दिक्कतों के बावजूद इंसानियत जीत गई।

मेडिकल वीजा के लिए भारत पर निर्भर पाकिस्तानी

  • पहले साउथ एशियाई देशों के ज्यादातर पेशेंट्स मेडिकल वीजा के लिए सिंगापुर या थाईलैंड का रुख करते थे। लेकिन, बीते कुछ साल से भारत में मेडिकल फैसेलिटीज में जबरदस्त सुधार हुआ। अब एशियाई देशों के ज्यादातर पेशेंट्स इलाज के लिए भारत को तवज्जो देते हैं।
  • दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में हर महीने करीब 500 पाकिस्तानी पेशेंट्स इलाज के लिए आते हैं। इनमें लीवर ट्रांसप्लांट के पेशेंट्स भी होते हैं। अपोलो में इस पर करीब 30 लाख रुपए खर्च होता है जबकि यूरोप या बाकी देशों में खर्च छह से सात गुना ज्यादा होता है। दूसरी बात, भाषा की भी ज्यादा दिक्कत नहीं आती।
  • दो साल पहले भी जब सरहद पर हालात खराब थे, भारत ने बस्मा नाम की पाकिस्तानी बच्ची को इमरजेंसी मेडिकल वीजा दिया था।