आंतकवाद को पूरी तरह नष्ट करने के लिए हो एकजुट : महाजन


मास्को : लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज कहा कि आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह से नष्ट करने और सीमापार से आतंकवाद की घुसपैठ रोकने के लिए सभी राष्ट्रों को एकजुटता से काम करना होगा।

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श्रीमती महाजन ने मास्को में रूस की संसद डूमा को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद ने वैश्विक स्वरुप ले लिया है। इसलिए आतंक के बढ़ते खतरे को देखते हुए पूरा विश्व दोहरा मानदंड अपनाए बिना निर्णायक और सामूहिक रूप से इसे परास्त करने के लिए एकजुट हो जाए। श्रीमती महाजन के नेतृत्व में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल रूस की यात्रा पर है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारत और रूस के राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है।

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भारत और रूस की मित्रता को उन्होंने संस्कृत श्लोक से स्मरण किया। श्लोक का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जो सुख, दु:ख, अकाल, उपद्रव, युद्ध के समय, राजा के दरबार में और श्मशान में भी साथ देता है वही सच्चा मित्र होता है। लोकसभा अध्यक्ष ने रूस-भारत संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों की ऊर्जा सेतु बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे नए क्षेत्र खोलने और सुगम गलियारे की स्थापना करने तथा दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं जनता में आपसी मेलजोल को सुगम बनाने के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता है।

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श्रीमती महाजन ने भारत और रूस के रक्षा संबंधों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज यह संबंध क्रेता-विक्रेता के संबंध तक ही सीमित न रहकर गहरे और दोस्ताना हो गए हैं। भारत और रूस संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता के बारे में सहमत हैं जिससे यह संस्था मौजूदा चुनौतियों और खतरों का और अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सके। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए पुरजोर समर्थन करने के लिए रूस को धन्यवाद दिया।

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श्रीमती महाजन ने रूस की संसद अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बातचीत के दौरान दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने निरंतरसंपर्क और समन्वय पर बल दिया। भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की चौथ बैठक में व्यापार, आर्थिक, सांस्कृतिक सहयोग, विशिष्ट सामरिक भागीदारी के क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबधो को सुगम बनाने में सांसदों की भूमिका, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन पर संसदीय विचार-विमर्श, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा तथा बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद और अतिवाद के विरुद्ध संघर्ष करना आदि विषय शामिल रहे।

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