उन्नाव गैंगरेप : BJP विधायक कुलदीप सैंगर के करीबी पर CBI ने दायर किया चौथा मामला


लखनऊ : उन्‍नाव गैंगरेप कांड  मामले में केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (CBI) ने चौथा मामला दायर किया है। इसमें मुख्‍य आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के करीबी शशि सिंह के बेटे शुभम सिंह को आरोपी बनाया गया है। शशि सिंह को इस मामले में सोमवार को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। सीबीआई इस मामले में पिछले साल जून में दायर ओरिजिनल FIR को भी फिर से खोलने पर विचार कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यूपी पुलिस ने पीड़िता के इस आरोप के बावजूद सेंगर के खिलाफ जांच क्‍यों नहीं की कि उसके साथ तीन अन्‍य लोगों के साथ-साथ बीजेपी विधायक ने भी दुष्‍कर्म किया था।यूपी पुलिस ने इस मामले में दर्ज FIR में माखी गांव के तीन लोगों शुभम सिंह, बृजेश यादव और अवध नारायण को नामजद किया था।

आरोप है कि इन लोगों ने 11 जून से 20 जून, 2017 के बीच पीड़िता के साथ दुष्‍कर्म किया। इन आरोपियों के खिलाफ बाद में अगस्‍त में चार्जशीट दायर की गई थी। पीड़‍िता का आरोप है कि सेंगर ने भी चार जून, 2017 को अपने आवास पर उसके साथ दुष्‍कर्म किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, CBI सूत्रों ने बताया कि वे इस मामले में 20 जून, 2017 को यूपी पुलिस द्वारा दायर पहले केस की जांच करेंगे, जिसमें पीड़‍िता ने रेप का आरोप लगाया है।उन्नाव रेप केस: पीड़िता के चाचा का आरोप- गांव वालों को धमकी दे रहे MLA के गुंडे, 2 लापताइस मामले में बीजेपी विधायक फिलहाल CBI की हिरासत में है। उसने खुद को ‘बेगुनाह’ करार देते हुए कहा कि यह सब उसे ‘फंसाने’ की साजिश है। सीबीआई इस मामले में पीड़‍िता, उसकी मां, संबंधियों और मेडिकल जांच करने वाले डॉक्‍टरों से पूछताछ कर उनका बयान रिकॉर्ड करा चुकी है। जांच एजेंसी इस मामले में उन्‍नाव पुलिस से भी पूछताछ करेगी।

CBI सेंगर के इस दावे की भी जांच करेगी, जिसमें उसने कहा है कि जून 2017 में जब रेप की यह कथित वारदात हुई, वह कानपुर में था।इस बीच, पीड़िता के चाचा ने आरोप लगाया है कि सेंगर के लोग अब गांव वालों को चुप रहने की धमकी दे रहे हैं। उन्‍होंने गांव वालों को चुप रहने या गांव छोड़ देने की धमकी दी है। गांव से दो लोग लापता भी हुए हैं। अदालत ने शनिवार को सेंगर को सात दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया था। इस मसले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर साल भर पहले सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय की तरफ से कार्रवाई के नाम पर रस्म अदायगी नहीं हुई होती तो पीड़िता का पिता नहीं मरता। पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो चुकी है। आरोप है कि सेंगर के लोगों ने उन्‍हें पुलिस के हवाले करने से पहले उनकी बुरी तरह पिटाई की थी।

 

 

 

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