कलेक्ट्रेट के बाहर चल रही ब्लैक मार्किट


शामली: पूरे जिले की कमान अपने हाथों में रखने का दावा करने वाले अधिकारियों की नांक के नीचे जिला कलेक्ट्रेट के बाहर ब्लैक मार्किट चल रही है, लेकिन किसी भी अधिकारी का ध्यान इस ओर नही पड़ रहा है। इस ब्लैक मार्किट में हो रही ओवररेटिंग से कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले फरियादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। यहां फोटो स्टेट के बढ़े-चढ़े दामों समेत खाने पीने तक के सामानों की बिक्री भी प्रिंट रेट से अधिक पर हो रही है। कलेक्ट्रेट में सभी विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद भी यह खेल जोरों-शोरों से चल रहा है। शामली-मुजफ्फरनगर मार्ग पर स्थित जिला कलेक्ट्रेट पर रोजाना जनपद के हजारों लोग अपनी समस्याओं और शिकायतों का निस्तारण कराने के लिए फरियाद लेकर अधिकारियों के कार्यालयों पर पहुंचते हैं।

कोई सरकारी विभाग के अधिकारियों की उदासीनता से परेशान होता है, तो कोई सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिलने या फिर किसी अन्य समस्या से प्रभावित होता है, जिसका हल कलेक्ट्रेट में बैठे अधिकारियों और वहां मौजूद कार्यालय के माध्यम से निकल जाता है। खास बात यह है कि जिस स्थान पर जिले के सभी विभागों के अधिकारी कलेक्ट्रेट साहब के आदेशों का पालन करने के लिए पहुंचते हों, तो ऐसे स्थान पर कोई भी अनैतिक या फिर धोखाधड़ी का कार्य होना संभव नही है, लेकिन इसके उलट कलेक्ट्रेट के बाहर ही दीए तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। शामली जिला कलेक्ट्रेट के बाहर अवैध रूप से खुली दुकानों पर सरेआम कालाबाजारी हो रही है। बढ़े चढ़े दामों पर फोटो स्टेट हो या फिर खाना पीने का सामान भी। पांच रूपए, 10 रूपए या फिर इससे अधिक का सामान प्रिंट रेट से अधिक पर बेचा जा रहा है। ऐसे में कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले लोग लुटने को मजबूर हैं। इतना ही नही कलेक्ट्रेट के बाहर चल रही ब्लैक मार्किट की कई दुकानें पूर्ण रूप से अवैध हैं, इसके बावजूद भी इन दुकानों का संचालन धडल्ले से हो रहा है।

दुकान वालें बोलते हैं, यहां तो ऐसे ही बिकता है सामान: प्रिंट रेट से अधिक पर खाने-पीने और अन्य जरूरतों का सामान कलेक्ट्रेट के बाहर चलने वाली ब्लैक मार्किट में प्रिंट रेट से अधिक पर मिलता है। यहां दुकान चलाने वाले दुकानदारों से विरोध करने पर वें बोलते हैं कि अधिकारियों को पता है कि यें माल महंगा क्यों बिक रहा है, उनका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता। अब आप आसानी से परख सकते हैं कि यदि कलेक्ट्रेट के बाहर इस तरह के हालात है, तो पूरे जिले में कैसे होंगे। फिलहाल अधिकारी इस कालाबाजारी के खेल के खिलाफ कोई कड़े कदम नही उठा रहे हैं।

बाहर कालाबाजारी और अंदर?: यदि घर के बाहर कालाबाजारी है, तो अंदर के हालात भी सही नही हो सकते। कुछ ऐसा ही इन दिनों कलेक्ट्रेट में भी दिखाई दे रहा है। कलेक्ट्रेट में पूर्ति विभाग से लेकर अन्य कई कार्यालयों में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें फैला चुका है, जो सीधे तौर पर बाहर नही निकाला जा सकता। कई कार्यालयों में तो बगैर सुविधा शुल्क के कोई भी काम नही होता। ऐसे हालातों में जनता में आक्रोश फैलना भी लाजिमी है।

– दीपक वर्मा

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