‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ के उद्घोष से गूंजे बौद्ध मठ


लखनऊ : गौतम बुद्ध की जन्मस्थली सिद्धार्थनगर और महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर समेत समूचे उत्तर प्रदेश में बुद्ध पूर्णिमा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनायी गयी। लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बरेली और इलाहाबाद समेत राज्य के कई इलाकों में स्थित बौद्ध मठ तड़के से ही ‘बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघ शरणम् गच्छामि’ के जयघोष गूंजने लगे। सभी बौद्ध स्थलों पर बौद्ध भिक्षुओं ने इकट्ठे होकर शांति दूत की शिक्षाओं को याद किया। श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा की फूलों, फलों व अगरबत्ती द्वारा पूजा-अर्चना की और प्रसाद चढ़ाकर वितरित किया।

मेरठ और बरेली में प्रभात फेरियां निकाली गयीं और संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। बौद्ध मठों में भगवान बुद्ध के उपदेशों और प्रार्थनाओं की गूंज सुनाई दी। सिद्धार्थनगर जिले में बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु में देश विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं ने स्तूप की परिक्रमा करने के बाद पूजा अर्चना की। कपिलवस्तु में शाम को एक स्वयंसेवी संगठन द्वारा दीपोत्सव के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर कुशीनगर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। उपासकों ने बौद्ध भिक्षुओं को श्रद्धापूर्वक संघदान देकर आशीर्वाद प्राप्त किया तो वहीं भिक्षुओं और उपासकों ने मंदिर मार्ग की सफाई कर लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया। शाम को महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर में परंपरागत ढंग से विशेष पूजा व धम्म देशना हुई। इस मौके पर बौद्ध भिक्षुओं ने कहा कि बौद्ध धर्म मानवतावादी धर्म है।

भगवान बुद्ध के सिद्धांतों का अनुशरण करके विश्व में शांति की स्थापना हो सकती है। बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर राज्यपाल रामनाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती समेत कई गणमान्य लोगों ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है। योगी ने  ट्वीट कर कहा, “अपने मानवतावादी एवं विज्ञानवादी बौद्ध धम्म दर्शन से भगवान बुद्ध दुनिया के सबसे महान महापुरूष हैं।

इसी दिन बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुयी थी।” केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण संगठन के पुरातत्वविद के एम श्रीवास्तव ने बताया कि खुदाई के दौरान कपिल वस्तु से गौतम बुद्ध के पिता राजा शुद्धोधन के राज प्रसाद के खंडहर और स्तूप पाए गए थे जिसके बाद कपिलवस्तु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था। कपिलवस्तु में पूरे साल देश-विदेश के बौद्ध धर्म के अनुयायियों का तांता लगा रहता है। श्रीलंका समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं।

– (वार्ता)