फिजूलखर्ची रोक जरूरी व अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के ​निर्देश


Yogi Adityanath

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को हर हाल में 15 मई 2018 तक पूरा किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अनावश्यक धनराशि का व्यय रोककर जरूरी एवं अधूरी परियोजनाओं को पहले पूरा किया जाए, जिससे संचालित अधूरी परियोजनाओं का लाभ जनता को शीघ्र मिल सके और राज्य पर पड़ने वाले अनावश्यक व्ययभार को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए गए सभी तटबन्धों का गहनता से निरीक्षण कराकर मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर कराया जाए। बाढ़ नियंत्रण के लिए संचालित परियोजनाओं को 15 मई, 2018 तक पूरा न कराए जाने की स्थिति में बाढ़ से होने वाली जन-धन हानि के लिए सम्बन्धित अधिकारी व अभियन्तागण जिम्मेदार होंगे।

मुख्यमंत्री ने शास्त्री भवन में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए तटबन्धों की मरम्मत एवं बाढ़ नियंत्रण के लिए आगामी कार्य योजना के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तटबन्धों की मरम्मत का कार्य शीघ्रता से पूरा करते हुए जहां जरूरी हो, वहां पर बोल्डर पिचिंग की जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के सम्बन्ध में कोई भी योजना बनाते समय स्थायी समाधान का दृष्टिकोण रखा जाए, क्योंकि अस्थायी और गुणवत्तारहित कार्यों से प्रत्येक वर्ष बाढ़ की स्थिति में जन-धन की व्यापक हानि होती है। उन्होंने कहा कि किए गए कार्यों के मॉनीटरिंग की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस वर्ष तटबन्धों में जिन जगहों पर कटान हुई है, उसकी मरम्मत करके पूर्व अवस्था की स्थिति लायी जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण सम्बन्धी कार्य समयबद्ध ढंग से गुणवत्ता के साथ सम्पन्न होने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण की परियोजनाओं पर विभागीय अधिकारियों का प्रभावी नियंत्रण न होने के कारण आपराधिक और दागी ठेकेदारों द्वारा राजकीय धन का दुरुपयोग करते हुए परियोजना को पूरा करने में काफी समय लगाया जाता है तथा उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। इस प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश देते हुए उन्हांेंने कहा कि प्रत्येक परियोजना में निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता का पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री ने तटबन्धों के रख-रखाव और उनकी मरम्मत की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि क्षतिग्रस्त तटबन्धों के कारण बाढ़ प्रभावित जनपदों में स्थानीय जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगाह किया कि इस प्रवृत्ति को आगे चलने नहीं दिया जाएगा और यदि कोई तटबन्ध मरम्मत के अभाव में टूटता है, तो इसके लिए सम्बन्धित अभियन्ता की जिम्मेदारी निश्चित रूप से तय की जाएगी। उन्होंने बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील जनपदों की चर्चा करते हुए कहा कि इनसे सम्बन्धित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ नियंत्रण के सम्बन्ध में वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर जाकर परियोजनाओं की प्रगति एवं गुणवत्ता का परीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि सिंचाई विभाग का दायित्व है कि वह प्रदेश की जनता को बाढ़ जैसी आपदा से बचाने के लिए पहले से तैयारी कर समाधान सुनिश्चित करे। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ से बचाव के लिए तटबन्धों की सुरक्षा एवं नए तटबन्धों के निर्माण का कार्य आवश्यक है।

इससे बाढ़ के समय नदियों के पानी को आबादी व कृषि क्षेत्र में फैलने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय नदी के बहाव से तटबन्ध एवं नदी के किनारों को कटान से क्षतिग्रस्त होने से बचाने का कार्य योजनाओं को बनाकर किया जाए। साथ ही, वर्षाजल की समुचित निकासी के लिए नालों का निर्माण, पुरर्स्थापना एवं सफाई कार्य भी समय रहते सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले पूर्वांचल वाले भाग में नेपाल से आने वाली नदियों के पानी के कारण भी बाढ़ की स्थिति का सामना करना पड़ता है। इन नदियों पर भारत सरकार एवं नेपाल सरकार के सहयोग व समन्वय से बहुउद्देशीय बांध परियोजनाएं तैयार कर बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए।

– असलम सिद्दीकी

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