श्री श्री रविशंकर हिन्दू-मुस्लिम एकता बिगाड़ने अयोध्या आ रहे हैं : मोहम्मद इकबाल


अयोध्या : विवादित बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे हाजी मोहम्मद हाशिम अंसारी के उत्तराधिकारी एवं बाबरी मस्जिद के पक्षकार मोहम्मद इकबाल ने कहा कि प्रख्यात आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर मंदिर-मस्जिद विवाद का हल ढूंढ़ने नहीं बल्कि हिन्दू-मुस्लिम एकता बिगाड़ने अयोध्या आ रहे हैं। बाबरी मस्जिद के पक्षकार मोहम्मद इकबाल ने आज यहाँ‘यूनीवार्ता’से कहा कि प्रख्यात आध्यात्मिक धर्मगुरू श्रीश्री रविशंकर का मंदिर-मस्जिद विवाद का हल ढूंढ़ने का मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही रविशंकर श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास सहित कई पक्षकारों से मिले थे लेकिन परिणाम शून्य निकला।

बाबरी मस्जिद के पक्षकार ने अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य रहे सैय्यद सलमान हुसैनी नदवी की बर्खास्तगी का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को बोर्ड में रहने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर और मस्जिद के मसले पर हिन्दुओं का भी मत एक नहीं है। मुस्लिम समाज जब उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करने के लिये तैयार है तो हिन्दू पक्ष ऐसा क्यों नहीं करते। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत का फैसला हम सभी लोग मानेंगे। राष्ट्रीय-अयोध्या विवाद दो अंतिम अयोध्या विवादित श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द, दास शास्त्री ने कहा कि आध्यात्मिक धर्म गुरू श्री श्री रविशंकर अयोध्या विवाद को अब सुलझा नहीं सकते हैं, क्योंकि हिन्दुओं में भी विभिन्न प्रकार के मंदिर-मस्जिद के पक्ष में विचारधारा है।

उन्होंने कहा कि निर्मोही अखाड़ की ओर से जो प्रस्ताव गया है उससे हल निकलने वाला नहीं है क्योंकि निर्मोही अखाड़ के महंत दिनेन्द, दास राम मंदिर पर पूर्ण रूप से हक जमाना चाहते हैं जो कि असंभव है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सलमान नदवी की बर्खास्तगी को उन्होंने राजनीति से प्रेरित बताया। श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी ने कहा कि मंदिर-मस्जिद विवाद फैजाबाद की अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है। अब इस मसले पर दोनों पक्षों से समझौते की कोई उम्मीद नहीं है इसलिये अदालत का फैसला ही मान्य होगा। इस बीच विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने कहा कि अयोध्या के संत-धर्माचार्य पहले ही कह चुके हैं कि विवादित श्रीरामजन्मभूमि पर केन्द, सरकार संसद में कानून बनाकर मंदिर का निर्माण कराये। इस मसले पर अब किसी भी हिन्दू और मुस्लिम पक्ष का समझौता मंजूर नहीं होगा। संत-धर्माचार्यों ने पहले ही कह दिया था कि चौदह कोसी परिक्रमा के अंदर बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं होगा।

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