भूगर्भ जल दोहन से पानी की किल्लत


अमरोहा : उत्तर प्रदेश के अमरोहा में भूगर्भ जल दोहन के कारण डार्क जोन घोषित विकास खण्डो में गर्मी बढने के साथ किल्लत शुरू हो गयी। डार्क जोन में जल स्तर करीब पांच फिट तक नीचे खिसक गया है जिससे हैंडपम्प और बोरिंग नलकूपों ने पानी छोड दिया है। सिचांई विभाग एवं जल निगम के आकडों के मुताबिक एक माह के भीतर ही जल स्तर चार से पांच फिट तक नीचे खीसक गया है। धनौरा मण्डी तहसील में कुंआखेडा, मेलिशया, मिलक, कोराल, दौराला समेत करीब 15 गांव को पिछले पांच सालों से डार्क जोन घोषित किया गया है।

यहां का अनुमानित जल स्तर 30 फीट तक है जो घटते-घटते अब 40 से 50 फिट तक नीचे पहुंच चुका है। पिछले साल तक यहां का जलस्तर 40 से 45 फिट था जो अब बढकर 50 फिट तक नीचे चला गया है। भारतीय किसान यूनियन के सदस्य आलोक कुमार ने कहा कि डार्क जोन विकास खण्ड जोया, हसनपुर गंगेश्री व गजरौला में 50-50 फिट कुइयां में पखां रख किसान किसी तरह फसलों की सिचाई कर रहे है। गर्मी के शुरूआती दौर मे ही तमाम हैडंपम्प साथ छोड चुके है।

बीस पच्चीस फीट नीचे मशीन रखकर पेयजल लेना संभव हो रहा है। संकट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक माह मे चार पांच फीट जल स्तर नीचे खिसक गया है। उन्होने बताया कि अमरोहा और धनौरा में नहर के नजदीक के क्षेत्रो में कुछ राहत जरूर है। यहां जल स्तर 30 फीट पर है। डार्क घोषित विकास खण्डो में जल स्तर का तेजी से नीचे गिरना आने वाले दशको में सिचाई के लिए खासा परेशानी वाला साबित होगा।

मई -जून माह में गर्मी के साथ-साथ पानी के लिए जल श्रोतों पर निर्भरता और बढेगी, जिससे जल स्तर और भी नीचे खीसकेगा। सिंचाई विभाग के सूत्रों ने बताया कि जिले में एक हजार निजी बोरिंग सूख गये हैं। जल निगम के अनुमान के मुताबिक ठप होने वाले निजी बोरिग की संख्या लगभग दो हजार से अधिक तक पहुंच गयी है। कही अधिक गहराई में लगाए जाने वाले दो दर्जन इंडिया मार्का हैडपंप भी कार्य करना बंद कर चुके हैं।

ग्राम मलेशिया के प्रधान महावीर सिंह और किसान नेता रामकुमार सिंह ने बताया कि पिछले कई सालों से डार्क जोन घोषित मण्डी धनौरा क्षेत्र में किसानो को सिंचाई के लिए नलकूप, ट्यूवेल तथा पम्पिंग सेट बोरिग पर प्रतिबंध लगा हुआ है तो दूसरी ओर जगह-जगह खुली बर्फ बनाने की फैक्ट्री, वेव शुगर इंडस्ट्री के बडे प्लांट के माध्यम से भूगर्भ जल का दोहन धडल्ले से किया जा रहा है।

नगर पालिका की टोटियों से लगातार बहता पानी, घर-घर सबमर्सिबल पम्पों से पानी की होती बरबादी को अनदेखा किया जा रहा है। किसान कुमार सिंह ने कहा कि किसानो को बोरिगं की अनुमति न देकर भेद भाव बरता जा रहा है। किसानो के सामने सिंचाई न होने से उन्हें फसल बचाने का संकट पैदा हो रहा है। धनौरा मण्डी की उप जिलाधिकारी प्रविणा ने तेजी से हो रहे भूगर्भ जल दोहन तथा बोरिग पर लगे प्रतिबंध के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की है।

– (वार्ता)

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