स्कूलों से मांगा फीस का ब्यौरा


देहरादून: सीबीएसई ने निजी स्कूलों से अपने शुल्क ढांचे और हाल के सालों में बढ़ाई गई फीस के बारे में डाटा देने को कहा है। फीस वृद्धि की समस्या हर साल अभिभावकों को सबसे ज्यादा परेशान करती है। इससे पहले बोर्ड स्कूलों को अपने परिसरों में यूनीफॉर्म और किताबें न देने की सलाह दे चुका है। पब्लिक स्कूल न सिर्फ अत्यधिक शुल्क लेते हैं, बल्कि हर साल शुल्क में मनमुताबिक बढ़ोतरी भी करते हैं। इसके अलावा कई मदों में फीस वसूली जाती है। ऐसे में अब सीबीएसई ने स्कूलों से उनके शुल्क ढांचे और शुल्क में बढ़ोतरी के बारे में पूछा है।

ताकि इस डाटा का विश्लेषण किया जा सके। फीस का ढांचा बोर्ड के पास पहुंचने से यह अंदाजा लगाया जा सकेगा कि स्कूल किस मद में कितना पैसा वसूल रहा है। बता दें कि फीस को लेकर अभिभावक लगातार शिकायत करते आए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी फीस के अतिरिक्त वसूली जाने वाली रकम को लेकर है। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि अगर स्कूल आंकड़े नहीं देते हैं तो उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

हाल में फीस बढ़ोतरी पर गुजरात सरकार का कदम ‘गुजरात सेल्फ फाइनेंस स्कूल बिल 2017 भी नजीर बना है। इसमें प्राइमरी के लिए फीस 15 हजार, सेकेंडरी के लिए 25 हजार व हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 27 हजार का प्रस्ताव है। अब सीबीएसई ने अतार्किक शुल्क और छिपी हुई फीस वसूलने पर लगाम कसने के लिए यह कदम उठाया है।

– सुनील तलवाड

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