समस्याओं को लेकर कर्मचारी मुखर


देहरादून: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखण्ड के प्रान्तीय प्रवक्ता अरूण पाण्डे ने बताया कि परिषद द्वारा पूर्व में घोषित आन्दोलन के प्रथम दिन गेट मीटिंग का प्रारम्भ पंचायती राज निदेशालय एवं आबकारी कार्यालय से किया गया। श्री पाण्डे ने बताया कि परिषद के पदाधिकारी बड़ी संख्या में एकत्र होकर पंचायती राज निदेशालय पहुंचे एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी संघ के पदाधिकारियाे के साथ मिलकर गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। गेट मीटिंग को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार का लगभग 6 माह का समय पूर्ण हो चुका है। किन्तु कर्मचारी समस्याओं के समाधन को लेकर किसी भी स्तर पर गम्भीरता नहीं दिखाई जा रही है, जिससे प्रदेश के कार्मिकों का धैर्य जवाब देने लगा है।

पूर्व में लम्बित समस्याओं का निराकरण होना तो दूर सातवें वेतन आयोग के एरियर एवं भत्तों के सम्बन्ध में भी कोई निर्णय होता नहीं दिख रहा है, जिससे मजबूर होकर परिषद को आन्दोलन पर उतरना पडा। वक्ताओं ने सरकार द्वारा हाल ही में लिये गये निर्णयों यथा-एसीपी को 10, 16 एवं 26 वर्ष के स्थान पर 10, 20 एवं 30 वर्ष में दिया जाना, 50 वर्ष के कार्मिकों की समीक्षा कर उनको सेवा से विरत किया जाना, विभिन्न विभागों को बिना कार्मिकों को विश्वास में लिये एकीकरण किया जाना आदि की आलोचना करते हुए कहा गया कि सरकार एवं शासन के निर्णयों से परिलक्षित होता है कि इस सरकार की प्राथमिकता में कार्मिक सबसे निचले पायदान पर हैं। गेट मीटिंग को सम्बोधित करते हुए परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ठा. प्रहलाद सिंह ने कहा कि परिषद के प्रतिनिधियाें ने इस बीच 2 बार मुख्यमंत्री से मिलकर प्रदेश कर्मियों की लम्बित समस्याआे के निराकरण हेतु अनुरोध किया।

किन्तु सरकार एवं शासन के स्तर से परिषद को आतिथि तक वार्ता हेतु कोई बुलावा नहीं आया है। जबकि परिषद द्वारा लगभग 2 माह पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन एवं वित्त मंत्री से भी पत्र लिखकर समय मांगा गया है। इसी बीच सरकार द्वारा वेतन समिति की कर्मचारी विरोधी रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें प्रदेश के अधिकांश संवर्गों की वेतन विसंगति के निराकरण को नकार दिया गया है।