उत्तराखंड के पंचेश्वर बांध के निर्माण को लेकर व्यापक विरोध शुरू


नैनीताल : भारत और नेपाल के बीच में महाकाली और सरयू के संगम में बनने वाले पंचेश्वर बहुद्देश्यीय बांध परियोजना का उत्तराखंड में व्यापक विरोध शुरू हो गया है। कुमाऊं के तीन जिलों के 130 गांव इसके डूब क्षेत्र में आ रहे है और इससे 11361 परिवार प्रभावित होंगे। ग्रामीणों ने अभी हाल ही में जिला मुख्यालय एवं झूलाघाट में परियोजना की डीपीआर जला कर सरकार को अपने मंसूबे बता दिये हैं। लेकिन सरकार के कानों में जूं नहीं रेंग रही है। ऐसे में अब किसी भी हालत में बांध का निर्माण नहीं होने देंगे।

भारत और नेपाल के बीच पंचेश्वर बहुद्देश्यीय परियोजना के निर्माण को लेकर वर्ष 2014 में सहमति बनी थी। दोनों देशों के मध्य इस परियोजना पर चालीस हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत मुख्य पंचेश्वर बांध के अलावा रूपाली गाढ़ एवं पूर्णागिरी डाम का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। पंचेश्वर बांध दुनिया का दूसरा बड़ा बांध होगा। इस परियोजना से 6720 मेगावाट बिजली तैयार की जाएगी। इस बांध की जद में भारत और नेपाल का कुल 134 वर्ग किमी क्षेत्र आ रहा है। जिसमें से उत्तराखंड का 120 वर्ग किमी क्षेत्र प्रभावित होगा।

नेपाल का मात्र 14 वर्ग किमी का क्षेत्र इसकी जद में आएगा। यही नहीं माना जा रहा है कि 130 गांवों के 11361 परिवार पंचेश्वर बांध परियोजना से प्रभावित होंगे। ग्रामीणों का विरोध बांध बनाने से पहले अपनायी जानी वाली जन सुनवाई प्रक्रिया को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार जन सुनवाई के लिए मौजूद प्रावधानों का पालन उचित तरीके से नहीं कर रही है। सोमवार रक्षाबंधन के दिन पिथौरागढ़ में महिलाओं ने झूलाघाट पुल पर राखी बांधकर अपने क्षेत्र को बचाने की मार्मिक पहल की। केन्द, की ओर से परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रबंधन योजना (ईएमपी) को हरी झंडी मिल गयी है।

प्रदेश सरकार को परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए प्रभावित गांवों के लोगों का विस्थापन व पुनर्वास के कार्य को अमलीजामा पहनाना है। जो कि सरकार के लिए एक टेढ़ी खीर साबित होगी। सरकार ने इसी सब बातों को ध्यान में रखते हुए पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत जिलों में जन सुनवाई का कार्यक्रम तय किया है। सरकार की ओर से चंपावत जिले में 9 अगस्त और पिथौरागढ़ में 11 अगस्त को जन सुनवाई सुनिश्चित की गयी है लेकिन सरकार को सिर मुंडाते ही ओले पडऩे लगे हैं। सरकार के जन सुनवाई को लेकर तीनों जिलों के ग्रामीणों में व्यापक रोष एवं आक्रोश फैल गया है।

ग्रामीण छोटे-छोटे समूहों में आंदोलन कर रहे हैं। अब ग्रामीण संगठित तरीके से आंदोलन करने की रणनीति बना रहे हैं। आंदोलनकारी महाकाली की आवाज नामक संगठन के तहत संगठित हो रहे हैं और आगे अपनी आवाज को बुलंद करेंगे। संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत एवं हिमधारा पर्यावरण अनुसंधान एवं क्रिया के सुमित महर ने बताया कि सरकार जनता को विश्वास में लिये बिना बांध निर्माण का काम कर रही है। बांध बनने से ग्रामीणों के हित प्रभावित होंगे। लोगों की अपनी माटी एवं गांव से संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। सरकार इस मामले को बेहद हल्के में ले रही है। ग्रामीण पिछले दो माह से आंदोलित हैं। झूलाघाट से लेकर चंपावत तक प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर हैं।

log in

reset password

Back to
log in
Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.

Send this to a friend