उत्तराखण्ड में बेहतर फिल्म नीति बने


देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य में एक बेहतर फिल्म नीति बननी चाहिए। जिसमें स्थानीय फिल्मों को बढ़ावा देना भी शामिल किया जाए। जो फिल्में अपनी स्थानीय बोली भाषा में बन रही हो उन्हें टैक्स फ्री भी करना चाहिए, तभी उत्तराखण्ड की बोली भाषा को बढ़ावा मिलेगा। उत्तराखण्ड में आलौकिक सौंदर्य है। जिसे देखते हुए निर्माता निदेशक यहां शूटिंग करना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए सरकार को आगे आना होगा और फिल्म निर्माता निदेशकों को मदद करनी होगी। सुभाष रोड स्थित वाईट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए फिल्म निदेशक जयदेव चक्रवर्ती ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को बने हुए 17 साल हो चुके हैं। लेकिन अभी तक यहां पर एक बेहतर फिल्म नीति नहीं बन पायी, यदि समय पर फिल्म नीति बन जाती तो निश्चित रूप से उत्तराखण्ड को फायदा होता। उन्होंने कहा कि वह फिल्म एवं टीवी धारावाहिकों का निर्देशन कर चुके है।

वह मूलतः उत्तराखण्ड के रहने वाले हैं और उनकी जन्म भूमि देहरादून व कर्मभूमि मुंबई है। उन्होंने कहा कि उनकी आराम्भिक शिक्षा से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई देहरादून में हुयी है। उनका रूझान शुरूआत से ही नाटको के प्रति रहा। उस दौर में उन्होने नाटककार अतिक अहमद की नाट्य संस्था पर्वतीय अभिरंग नाट्य अकादमी में अपने अभिनय की प्रतिभा को बाखुबी दर्शाया। उन्होंने बताया कि कई नाटको में काम करने के बाद उन्होने मुंबई का रूख किया जहां उन्होने कई वर्षो के कड़े संघर्षो के उपरांत संजय खान द्वारा निर्देशित द ग्रेट मराठा में सह निर्देशन करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। तत्पश्चात उन्होंने कई फिल्माेे व धरावाहिकों में निदेशक के तौर पर अपना योगदान दिया। मुंबई में रहते हुए भी वे अपने मूल स्थान को नहीं भूले। एक सवाल के जवाब में श्री चक्रवर्ती ने कहा कि वह भविष्य में उत्तराखण्ड के आलौकिक सौंदर्य को देखते हुए यहां अपनी एक फिल्म की शूटिंग करना चाहते हैं। मुख्य रूप से पर्वतीय अभिरंग नाट्य अकादमी के अतिक अहमद मौजूद थे।

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