बंद पड़े मकान में चोरों का धावा


रुद्रपुर: थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित दो माह से बंद पड़े मकान में बीती रात्रि चोरों ने धावा बोलकर हजारों रुपये की नगदी चोरी कर ली। चोरों ने घर में रखी अलमारी को बुरी तरह तोडफ़ोड़ दिया। यही नहीं घर में रखे बेड एवं अन्य सूटकेसों की चोरों द्वारा इस तरह ढूंढ खकोर मचाई गई थी, मानों उन्हें किसी खास चीज की वहां से तलाश हो। परिजनों की सूचना पर ट्रांजिट कैंप पुलिस मौके पर पहुंची और मौका मुआयना किया। ट्रांजिट कैंप थाने के शिमला पिस्तौर निवासी सावित्री शर्मा पत्नी रामवचन शर्मा का मुख्य मार्ग पर मकान बना है। जबकि सावित्री शर्मा का दूसरा मकान गोविन्द बिहार में भी स्थित है। करीब छह दिन पूर्व सावित्री देवी शिमला पिस्तौर स्थित मकान पर गई थी तब सब कुछ ठीक ठाक था।

आज सुबह जब सावित्री देवी मकान में पहुंची तो वो मकान के सभी दरवाजे चौपट मिले और घर के अंदर रखी अलमारियां टूटी मिली। अलमारी के सभी लॉकरों को भी चोरों ने तोड़ दिया था। जिसमें से हजारों रुपये चोर चुरा ले गए। नगदी कितनी थी अभी शैलेंद्र कुमार के नहीं पहुंचने से पता नहीं चल सका। घटना की सूचना पर पहुंची ट्रांजिट कैंप पुलिस ने मौके पर तहकीकात की। पुलिस ने बताया कि चोर चोरी करने के इरादे से घर में घुसे थे। घर का काफी सामान तोडफ़ोड़ कर नष्ट किया गया है। सावित्री ने बताया कि अलमारी में नगदी रखी गई थी, जोकि गायब है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घर में चोरी करने के इरादे से घुसे चोरों द्वारा लाए गए सब्बल को बरामद किया है। पुलिस ने सब्बल को सावित्री देवी के घर से ही बरामद किया है। पुलिस सब्बल को अपने साथ थाने ले आई है।

मालकिन की सूझबूझ से लाखों रुपये के जेवर चोर नहीं चुरा सके घर की मालकिन की सूझबूझ से लाखों रुपये के जेवर चोर नहीं चुरा सके। सावित्री देवी ने लाखों के बेशकीमती आभूषणों को उसी घर के अंदर बनी मोमटी के अंदर रुई के कट्टे में रख दिए थे। ऐसा भी नहीं है कि चोरों ने उस कट्टे को खंगाला न हो, लेकिन चोर उसमें आभूषण नहीं ढूंढ सके। सावित्री को इन्हीं जेवरों के चुर जाने की आशंका थी। इस पर उसने सबसे पहले रुई के कट्टे को अपने बड़े बेटे से खंगलवाया कि जेवर हैं या नहीं, लेकिन उसमें बड़े बेटे शैल कुमार को जेवर नहीं मिले और रूर्ई का कट्टा फिर भरकर रख दिया गया। इस पर सावित्री के दिल को सुकुन नहीं मिला तो उसने स्वयं रुई के कट्टे को खंगाला, जिसमें समूचे जेवर रुई में बंधे हुए मिल गए। इसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।

– सुरेन्द्र तनेजा

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