हरिद्वार में धूमधाम से मनाया रक्षाबंधन


हरिद्वार: हरिद्वार में रक्षाबंधन का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दिन बहने दूर-दराज से अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने हेतु अपने अपने ससुराल से आयीं तो कुछ बहनों के न जाने पर खुद भाई भी बहनों के ससुराल पहुंचे। उधर, रक्षाबंधन के त्यौहार के चलते बसें व ट्रेनें खचाखच भरे रहे। इस वर्ष भद्रा ने भी राखी बांधने में बाधा उत्पन्न की, जिसके चलते मात्र दो घंटे ही भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर पांच मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर 1 बजकर 53 मिनट तक रहा। रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यानी छह अगस्त की रात्रि को साढ़े दस बजे से भद्रा का प्रारंभ हो गया था। जिसका समापन सात अगस्त को सुबह 11 बजकर 5 मिनट पर हुआ।

शुभ मुहूर्त में ही बहन और भाई के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाना अधिक फलदायी था, जिसे ध्यान में रखते हुए अधिकांश बहनों में अपने भाईयों की कलाईयों पर राखी बांधी। वहीं, अपनी-अपनी बहनों को रक्षाबंधन के दिन भाईयों ने भारी-भरकम गिफ्ट दिए तो कुछ भाईयों ने अपने बजट को ध्यान में रखकर बहनों को उपहार दिए। रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसके पहली वाली पूर्णिमा गुरु-पूर्णिमा थी, जो गुरु और शिक्षकों को समर्पित थी| उसके पहले बुद्ध पूर्णिमा थी, और उसके भी पहले चैत्र-पूर्णिमा थी|तो इस चौथी पूर्णिमा को श्रावण-पूर्णिमा कहते हैं और ये वाला पूरा चांद भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य के सम्बन्ध को समर्पित है।

ये एक रक्षा का रिश्ता है, जहां बहन भाई की रक्षा करती है। इसलिए, रक्षा बंधन ऐसा त्यौहार है, जहां सारी बहनें जाती हैं और अपने भाइयों को राखी बांधती हैं और कहती हैं ‘मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी’ और तुम मेरी रक्षा करो और ये कोई ज़रूरी नहीं है, कि वे उनके अपने सगे भाई ही हों। बल्कि, वे तो सभी को राखी बांधती हैं और सभी उनके भाई बन जाते हैं। तो ये प्रथा इस देश में काफी प्रचलित है और ये श्रावण पूर्णिमा का बहुत बड़ा त्यौहार है। आज ही के दिन यज्ञोपवीत बदला जाता है। रक्षाबंधन पर राखी बांधने की हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है।

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