मनरेगा योजना में भारी घोटाला


सितारगंज: उपजिलाधिकारी के आदेश के बाद खंड विकास अधिकारी ने ग्राम पंचायत खुनसरा में विकास कार्यों में हुई धांधली की जांच सहायक खंड विकास अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम को सौंप दी है। अनियमितता के इस गंभीर मामले में ग्राम प्रधान ने अपनी ही नाबालिग पुत्री के नाम से मनरेगा की मजदूरी का भुगतान कर दिया था। विकास खंड की ग्राम पंचायत खुनसरा के महावीर सिंह पुत्र जयराम ने उपजिलाधिकारी को प्रधान के खिलाफ शिकायती पत्र सौंपा था। जिसमें तमाम अनियमितताओं का जिक्र करते हुये मामले की जांच पर जोर दिया गया था। पत्र में कहा गया था कि मनरेगा योजना के तहत गांव में तीन व्यक्ति ऐसे है जिनका जॉब कार्ड का पंजीकरण नहीं है। इन्हीं में ग्राम प्रधान की पुत्री, देवर व भतीजे शामिल हैं।

दिलचस्प यह है कि प्रधान की पुत्री पुष्पा गौतमी की जन्म तिथि 29 मई 1999 है। इस हिसाब से उसे 29 मई 2017 को 18 वर्ष पूरे हुये हैं। लेकिन प्रधान ने उसे वर्ष 2016 में ही मनरेगा के तहत सौ दिन की मजदूरी पाने वाले पात्रों की सूची में दर्शाकर मजदूरी का भुगतान कर दिया। जाहिर है कि उस समय पुष्पा नाबालिग थी। इनके अतिरिक्त कई और लोग भी ऐसे है जो मनरेगा के पात्र नहीं हैं। एक व्यक्ति तो बैंक के एटीएम में गार्ड के रूप में तैनात है। उन्हें भी मजदूरी का भुगतान कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने गांव में बीपीएल कार्ड बनाने में भी धांधली का आरोप लगाया। उसका कहना था कि कई अपात्रों के कार्ड बना दिये गये।

जबकि पात्रों के नहीं बने। आरोप है कि प्रधान ने अपने ही परिवार के लोगों के चार बीपीएल कार्ड बनवाये हैं। आरोप है कि जिनके घरों में पूर्व से ही शौचालय बने थे उन्हें इंदिरा आवास देकर शौचालय के नाम पर भी धन आहरित कर लिया गया। जो शौचालय बनाये भी गये उनमें न तो सीट लगी हैं न दरवाजे। एक मामले में तो पति व पत्नी दोनों के नाम इंदिरा आवास आवंटित कर दिया गया। पति तो सरकारी मुलाजिम भी है। आरोप है कि गांव में कीटनाशकों के छिड़काव, पंचायत भवन के लिए बिना विद्युत संयोजन के ही इंवर्टर क्रय व मिट्टी भरान आदि में भी धांधली की गई। महावीर की शिकायत पर उपजिलाधिकारी ने 27 मई 2017 को खंड विकास अधिकारी को जांच का आदेश दिया। तब से यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब बीडीओ मीना मैनाली ने सहायक खंड विकास अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर मामले की जांच शुरू करा दी है। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो कई घोटाले सामने आने की संभावना है।

– रमेश यादव

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