समीक्षा बैठक में बिना तैयारी के आने वाले अफसरो को रावत की कड़ी फटकार


देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने उथर प्रदेश के साथ परिसम्पत्तियों के लम्बित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान कुछ अधिकारियों के बिना तैयारी के आने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी दी और कहा कि अगली बार ऐसी लापरवाही पर सीधे निलंबन की कार्रवाई की जायेगी । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसम्पत्तियों से सम्बंधित प्रकरणों पर यहां कल रात हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ होने वाली बैठक से पूर्व सभी विभाग अपने प्रकरणों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर लें और सभी प्रकरणों को न्यायालय में लम्बित प्रकरण, निस्तारित प्रकरण, विवादित प्रकरण और भारत सरकार के स्तर पर लम्बित प्रकरण की श्रेणी में विभाजित करके उथराखण्ड के पक्ष को मजबूती से रखें। यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, रावत ने बैठक में कुछ विभागों के अधिकारियों के बिना तैयारी के आने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी दी और कहा कि अगली बार ऐसी लापरवाही पर सीधे निलंबन की कार्रवाई की जायेगी।

उन्होंने मुख्य सचिव को अगले 15 दिनों के भीतर विभागवार सभी मामलों की गहन समीक्षा करते हुए राज्य के पक्ष को मजबूत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं 15 दिन बाद सभी लम्बित प्रकरणों की पुन: समीक्षा करेंगे और इससे पूर्व एक बार कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी परिसम्पत्तियों के लम्बित प्रकरणों की समीक्षा करेंगे। बैठक में सिंचाई विभाग द्वारा बताया गया कि उथर प्रदेश एवं उत्तराखंड के मध्य कुल 1313 आवासीय एवं अनावासीय भवनों में से उथराखण्ड द्वारा 1013 भवनों की मांग की गई है जबकि उथर प्रदेश द्वारा अभी तक 278 भवनों पर ही स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी प्रकार हरिद्वार में सिंचाई विभाग के अधीन कुम्भ क्षेत्र सहित प्रदेश में कुल 4230 हेक्टेयर भूमि पर सहमति बनायी जानी है।

रूर्जा विभाग द्वारा बताया गया कि उथर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना हेतु एलआईसी से लिये गये 353 करोड़ रूपये के रिण की अदायगी उथर प्रदेश द्वारा ही की जाने की मांग की गई है और इस सम्बंध में महालेखाकार की रिपोर्ट भी सकारात्मक है जिसके अनुसार इस धनराशि का उपयोग तत्कालीन उथर प्रदेश विद्युत परिषद द्वारा मनेरी भाली परियोजना में न करके अन्य मदों में किया गया है। विथ विभाग द्वारा बताया गया कि नौ नवम्बर 2000 को राज्य गठन से 31 मार्च 2011 की अवधि तक पेंशन दायित्व के मद में उथर प्रदेश ने कुल 2633.16 करोड़ रूपये उथराखण्ड को दिये हैं। इस मद में उत्तराखंड का मानना है कि पेंशन दायित्व का विभाजन सतत् रूप से होना चाहिए और इस क्रम में उथराखण्ड ने 2011 से 2017 तक 06 वर्ष की अवधि हेतु अतिरिक्त 2800 करोड़ रूपये का दावा किया है। बैठक में परिवहन, आवास, सहकारिता, गन्ना-चीनी, पेयजल एवं स्वच्छता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति पशुपालन, सूचना एवं लोक सम्पर्क, पर्यटन विभाग के अधीन होटल अलकनंदा, रेशम, गृह, प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा, वन, ग्राम्य विकास, माध्यमिक शिक्षा, औद्योगिक विकास विभागों की परिसम्पत्तियों के लम्बित प्रकरणों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

(भाषा)

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